
बिहार में ठंड ने अब दस्तक दे दी है और उत्तर भारत की तरह यहां भी सुबह-शाम का तापमान लगातार गिरता जा रहा है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, वैसे-वैसे बच्चों और अभिभावकों की निगाहें अब बिहार स्कूलों की शीतकालीन छुट्टियों (Winter Vacation 2025-26) पर टिकी हुई हैं। यह वो समय होता है जब बच्चों को पढ़ाई से थोड़ा ब्रेक मिल जाता है और परिवार के साथ गर्म रज़ाई में सुकून के पल बिताने का मौका मिलता है।
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सर्दी का असर और छुट्टियों की तैयारी
दिसंबर के मध्य तक बिहार के ज़्यादातर जिलों में मौसम का मिज़ाज बदलने लगता है। सुबह कोहरे से ढकी सड़कों पर वाहन धीरे-धीरे रेंगते नज़र आते हैं, जबकि दिन के समय भी सूरज के दर्शन मुश्किल होते हैं। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए सुबह-सुबह स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि हर साल की तरह इस बार भी शिक्षा विभाग बच्चों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विंटर वेकेशन देने की तैयारी में है।
अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन पिछले वर्षों के अनुभवों को देखें तो रुझान साफ है, बिहार के सरकारी और निजी स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियां आमतौर पर दिसंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू होती हैं।
कब से कब तक रह सकता है स्कूल ब्रेक?
मौसम के मौजूदा हालात और शैक्षणिक कैलेंडर को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार भी शीतकालीन अवकाश 25 दिसंबर 2025 (क्रिसमस डे) से शुरू हो सकता है। इसके बाद 26 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक स्कूल बंद रहने की संभावना है, और 2 जनवरी 2026 से दोबारा कक्षाएं शुरू हो सकती हैं। इस तरह छात्रों को कुल मिलाकर करीब 7 दिनों का विंटर ब्रेक मिलने की उम्मीद है।
हालांकि यह डेट्स अभी संभावित हैं। ठंड की तीव्रता और स्थानीय प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा कि छुट्टियों की अवधि में कोई बदलाव हो या नहीं। कई बार जरूरत पड़ने पर जिलास्तरीय आदेश से छुट्टियों को कुछ दिनों के लिए बढ़ा भी दिया जाता है।
बच्चों के लिए राहत और आनंद का समय
विंटर वेकेशन बच्चों के लिए आनंद का मौसम लेकर आता है। ठंड की वजह से पूरे साल की भागदौड़ से राहत मिलती है और छात्रों को दोबारा ऊर्जा के साथ नई शुरुआत करने का मौका मिलता है। अभिभावक भी इस दौरान परिवार के साथ समय बिताने, बच्चों को घर पर पढ़ाई में मदद करने या बाहर पिकनिक मनाने की योजना बना सकते हैं।
स्कूलों में भी इस समय शिक्षक नए साल के लिए शैक्षणिक गतिविधियों की रूपरेखा तय करते हैं। कुछ निजी संस्थान इस बीच में वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी के लिए टाइमटेबल जारी करते हैं ताकि बच्चे छुट्टियों के बाद पढ़ाई में आसानी से वापसी कर सकें।
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी ध्यान
इस मौसम में बच्चों की सेहत सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। तापमान के गिरने से सर्दी-जुकाम, फ्लू या वायरल जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि बच्चे सर्द हवाओं से बचाव के लिए गर्म कपड़े पहनें और खानपान पर ध्यान दें। स्कूलों में भी यह देखा गया है कि ठंड के दिनों में उपस्थिति कम होती है, इसलिए अवकाश देना छात्रों और शिक्षकों दोनों के लिए राहतभरा कदम साबित होता है।
सरकारी नोटिस पर नज़र बनाए रखें
चूंकि अब तक बिहार शिक्षा विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, इसलिए छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह की पक्की जानकारी के लिए शिक्षा विभाग की वेबसाइट या स्थानीय समाचार पत्रों पर नज़र बनाए रखें। जैसे ही ठंड का स्तर और बढ़ेगा, सरकार की ओर से छुट्टियों की घोषणा की संभावना और मजबूत हो जाएगी।




