
देहरादून जिले में सरकारी राशन प्रणाली एक बार फिर सुर्खियों में है। उपभोक्ताओं को इस महीने सस्ता गल्ला की दुकानों से मिलने वाले चावल के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। सरकारी गोदाम फिलहाल खाली पड़े हैं क्योंकि अब तक फोर्टीफाइड चावल की सप्लाई नहीं पहुंच सकी है। इस वजह से न सिर्फ गरीब तबके के लोग बल्कि सरकारी स्कूलों में mid-day meal योजना पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
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गोदाम खाली, राशन डीलर परेशान
राशन डीलरों के अनुसार सरकारी चावल की आपूर्ति न होने के कारण दुकानें खाली हैं और उपभोक्ताओं को रोजाना वापस लौटाना पड़ रहा है। कई डीलरों ने बताया कि वे पूर्ति विभाग के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि सप्लाई कब शुरू होगी। गोदामों में चावल की अनुपलब्धता के चलते कई स्थानों पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की गति रुक गई है, जिससे गरीब उपभोक्ता खासा चिंतित हैं।
फोर्टीफाइड चावल की सप्लाई में रुकावट
इस बार समस्या का मुख्य कारण है फोर्टीफाइड चावल की कमी। केंद्र सरकार के आदेशानुसार अब सभी योजनाओं में सामान्य चावल में फोर्टीफाइड राइस का मिश्रण किया जाता है ताकि पोषण स्तर बेहतर हो सके। लेकिन फिलहाल केंद्र से यह nutrient-rich fortified rice समय पर नहीं पहुंच पाया है। राइस मिलर सामान्य चावल को तब तक प्रोसेस नहीं कर पा रहे हैं, जब तक उन्हें फोर्टीफाइड चावल की खेप नहीं मिल जाती। यही कारण है कि पूरे जिले के सभी सरकारी गोदाम खाली पड़े हैं।
3.75 लाख कार्डधारक प्रभावित
देहरादून जिले में इस समय करीब 3.75 लाख राशन कार्डधारी विभिन्न योजनाओं के तहत सरकारी चावल पाने के हकदार हैं। इनमें अंत्योदय (Antyodaya), प्राथमिकता (Priority Household) और सामान्य उपभोक्ता शामिल हैं। मगर सप्लाई में देरी से अब सभी को इंतजार करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “हम हर महीने समय पर दुकान पर पहुंचते हैं, लेकिन इस बार केवल जवाब मिल रहा है कि चावल नहीं आया।”
मिड-डे मील योजना पर भी असर
केवल राशन उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि सरकार द्वारा संचालित मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) योजना भी इससे प्रभावित हो रही है। जिले के लगभग 30 सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए जो चावल भेजा जाता है, वो इन्हीं सस्ता गल्ला दुकानों से आता है। अब इन स्कूलों में भोजन बनाने में दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। कई शिक्षकों ने बताया कि स्टॉक खत्म होने के चलते छात्रों को वैकल्पिक व्यवस्था से भोजन देना पड़ रहा है।
केंद्र से सप्लाई के लिए लिखा गया पत्र
वरिष्ठ विपणन अधिकारी हरेंद्र सिंह रावत ने स्थिति की गंभीरता स्वीकार की है। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से केंद्र सरकार को पत्र भेजा गया है, ताकि फोर्टीफाइड चावल की सप्लाई जल्द शुरू की जा सके। साथ ही, राइस मिलरों को निर्देश जारी किए गए हैं कि जैसे ही फोर्टीफाइड स्टॉक पहुंचे, तुरंत प्रोसेसिंग शुरू करके गोदामों में सप्लाई भेजी जाए। अधिकारी ने यह भी कहा कि विभाग की पूरी कोशिश है कि महीने के अंतिम सप्ताह तक वितरण शुरू कर दिया जाए।
उपभोक्ताओं की उम्मीद और प्रशासन की चुनौती
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए सरकारी राशन महीने की सबसे बड़ी राहत होता है। ऐसे में देरी से जनता में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। अधिकारी मानते हैं कि यह स्थिति अस्थायी है और जल्द नियंत्रण में आ जाएगी। हालांकि यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जब हर साल सप्लाई का पैटर्न तय होता है, तो प्रोसेसिंग और डिलीवरी में देरी क्यों होती है?

















