
अगर आप अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री कराने की योजना बना रहे हैं, तो अब आपके लिए एक नया नियम लागू हो गया है। सरकार ने तय किया है कि अब 20 हजार रुपये से अधिक की रजिस्ट्री फीस केवल ऑनलाइन माध्यम से ही जमा की जा सकेगी। पहले अधिकांश लोग यह फीस नकद में जमा कराते थे, लेकिन अब बागपत, बड़ौत और खेकड़ा में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है। भविष्य में इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
जिनकी फीस 20 हजार रुपये से कम है, वे अभी भी नकद भुगतान कर सकते हैं, लेकिन अगर फीस इससे अधिक है, तो आपको ऑनलाइन मोड से फीस जमा करनी ही होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और रजिस्ट्री प्रक्रिया में धोखाधड़ी या देरी की संभावना कम होगी।
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ऑनलाइन फीस से बढ़ेगा पारदर्शिता
ऑनलाइन फीस जमा करने की व्यवस्था से अब आम लोगों को बैंक या रजिस्ट्री कार्यालय में लंबी कतारों से राहत मिलेगी। लोग अपने घर बैठे या साइबर कैफे के माध्यम से आसानी से फीस जमा कर सकेंगे। इससे सरकार के रेवेन्यू में भी बढ़ोतरी होगी और फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा।
स्टांप विभाग की एआईजी शचि कुमारी के अनुसार, स्टांप शुल्क के अतिरिक्त एक प्रतिशत फीस देना आवश्यक है। पहले यह फीस नगद ली जाती थी लेकिन अब इसे केवल डिजिटल माध्यम से स्वीकार किया जाएगा। यह परिवर्तन सरकार के “डिजिटल इंडिया” अभियान की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा सकता है।
अब पांच हजार में करा सकेंगे पारिवारिक संपत्ति का विभाजन
नए नियमों के तहत अब परिवार के सदस्य केवल पांच हजार रुपये स्टांप शुल्क और पांच हजार रुपये निबंधन शुल्क देकर अपनी पैतृक संपत्ति का विभाजन करा सकते हैं। यह सुविधा केवल तीन पीढ़ियों तक ही सीमित है जैसे दादा, बेटा और पोते तक। इसका मतलब यह है कि अब कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति को अपने बच्चों के नाम समान हिस्सों में रजिस्ट्री करा सकता है।
पहले इस प्रक्रिया में आम रजिस्ट्री की तरह पूरे स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ता था, जिससे कई परिवार इसे टालते रहते थे। नई व्यवस्था के बाद यह काम न सिर्फ सस्ता बल्कि सरल भी हो गया है।
विवादों में कमी लाने की पहल
पारिवारिक संपत्ति के विभाजन को लेकर अक्सर परिवारों में मतभेद या झगड़े पैदा हो जाते हैं। नई नीति इन विवादों को रोकने में मदद कर सकती है। अब जब प्रक्रिया आसान और सस्ती होगी, तो लोग पहले ही सही कानूनी तरीके से विभाजन करा लेंगे, जिससे आगे किसी प्रकार का झगड़ा या अदालत में मामला जाने की संभावना कम रहेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम सामाजिक समरसता बनाए रखने की दिशा में भी फायदेमंद साबित होगा।
किरायानामा की फीस में जबरदस्त कमी
रजिस्ट्री और संपत्ति विभाजन के अलावा, सरकार ने किरायानामा दर्ज कराने पर लगने वाले शुल्क में भी बड़ी छूट दी है। पहले किरायानामा करने पर दो प्रतिशत शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत यह बहुत ही नाममात्र रह गया है।
अब
- एक वर्ष के लिए किरायानामा कराने पर 500 रुपये,
- पांच वर्ष के लिए 1500 रुपये,
- और पांच से दस वर्ष के लिए केवल 2000 रुपये स्टांप शुल्क देना होगा।
हालांकि, अगर किराए की राशि 10 लाख रुपये से अधिक है, तो दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी पहले की तरह ही लागू रहेगी। यह बदलाव खासकर छोटे दुकानदारों, मकान मालिकों और किरायेदारों के लिए राहत लेकर आया है।
क्यों है यह बदलाव जरूरी
सरकार का उद्देश्य रजिस्ट्री और किरायानामा प्रक्रियाओं को पारदर्शी, किफायती और डिजिटल बनाना है। इससे पुरानी नकद आधारित प्रणाली में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। साथ ही, लोगों को समय और धन दोनों की बचत होगी।
नई व्यवस्था का फायदा उन लोगों को सबसे ज्यादा मिलेगा जो अपनी संपत्ति को आने वाली पीढ़ियों में बांटना चाहते हैं या किराए पर संपत्ति देना या लेना चाहते हैं। डिजिटल प्रक्रिया के कारण अब कोई भी व्यक्ति अपने लेन-देन के हर चरण की जानकारी ऑनलाइन देख सकेगा, जिससे व्यवस्था और अधिक विश्वसनीय बनेगी।

















