
भारत की रणनीतिक सुरक्षा और पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ा विमर्श तेज हो गया है, हालिया चर्चाओं और सामरिक विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, भारत के बेहद संवेदनशील ‘चिकन नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) की चौड़ाई वर्तमान के 22 किलोमीटर से बढ़कर 150 किलोमीटर तक हो सकती है, इस बदलाव का केंद्र बांग्लादेश का ‘रंगपुर डिवीजन’ है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और वहां रह रहे लाखों हिंदुओं के कारण चर्चा में है।
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क्या है ‘चिकन नेक’ की चौड़ाई का गणित?
वर्तमान में पश्चिम बंगाल का सिलिगुड़ी कॉरिडोर भारत को उसके आठ पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है, यह मात्र 22 किलोमीटर चौड़ा है, जिसे सैन्य भाषा में ‘चोक पॉइंट’ माना जाता है।
- 150 KM तक विस्तार: सामरिक विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि बांग्लादेश का रंगपुर डिवीजन (लगभग 16,185 वर्ग किमी) एक स्वतंत्र इकाई बनता है या भारत के रणनीतिक प्रभाव में आता है, तो सिलीगुड़ी कॉरिडोर की चौड़ाई बढ़कर 150 किमी हो जाएगी।
- सुरक्षा का लाभ: इससे पूर्वोत्तर राज्यों के साथ कनेक्टिविटी अभेद्य हो जाएगी और चीन या पाकिस्तान समर्थित किसी भी खतरे से निपटने की भारत की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
23 लाख हिंदुओं की सुरक्षा का बड़ा मुद्दा
रंगपुर डिवीजन का मुद्दा केवल जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 23 लाख हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से भी गहराई से जुड़ा है।
- हिंसा और पलायन: जुलाई और दिसंबर 2025 में रंगपुर के गंगाचरा सहित कई इलाकों में हिंदू घरों पर हमलों और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं।
- अलग सुरक्षित क्षेत्र की मांग: बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ और अल्पसंख्यकों पर हमलों के बीच, कई नागरिक समाज और संगठन रंगपुर डिवीजन को हिंदुओं के लिए एक ‘सुरक्षित क्षेत्र’ के रुप में देखने लगे हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र के अलग होने से इन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा संभव हो सकेगी।
बांग्लादेश की ‘कमजोर नस’: दो नए चिकन नेक
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दिसंबर 2025 में कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि भारत के पास केवल एक चिकन नेक है, लेकिन बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि उसके पास दो ‘चिकन नेक’ हैं जो भारत से कहीं अधिक असुरक्षित हैं:
- उत्तर बांग्लादेश कॉरिडोर (80 किमी): दक्षिण दिनाजपुर से मेघालय के बीच स्थित, यदि यहां कोई बाधा आती है, तो पूरा रंगपुर डिवीजन मुख्य बांग्लादेश से कट सकता है।
- चटगांव कॉरिडोर (28 किमी): यह ढाका को उसके सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह से जोड़ता है, यह गलियारा भारत के त्रिपुरा के बेहद करीब है।
रणनीतिक तैयारी और भारत का रुख
भारत ने भी इस संवेदनशील गलियारे की सुरक्षा के लिए दिसंबर 2025 तक कई कड़े कदम उठाए हैं:
- तीन नई सैन्य छावनियां: सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास बामुनी, किशनगंज और चोपड़ा में तीन नई आर्मी गैरिसन तैनात की गई हैं।
- आधुनिक हथियार: इस क्षेत्र में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, राफेल लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन और ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात की गई हैं, जो किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।
हालांकि रंगपुर डिवीजन के अलग होने की बात फिलहाल एक रणनीतिक विमर्श और विशेषज्ञों का सुझाव है, लेकिन बांग्लादेश में अस्थिरता और हिंदुओं पर बढ़ते हमलों ने इस ‘पार्शियल पार्टीशन’ या रणनीतिक अधिग्रहण की चर्चा को वैश्विक स्तर पर हवा दे दी है।

















