
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय की कानूनी परिभाषा को लेकर एक बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है, 24 दिसंबर, 2025 को जारी इस नए निर्देश के अनुसार, अब हर किसी पेय पदार्थ को ‘चाय’ (Tea) नहीं कहा जा सकेगा।
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क्या है नया नियम?
FSSAI के अनुसार, केवल उन्हीं उत्पादों को ‘चाय’ के रूप में लेबल या विज्ञापित किया जा सकता है जो कैमेलिया साइनेंसिस (Camellia sinensis) पौधे की पत्तियों, कलियों या कोमल तनों से तैयार किए गए हों। इस परिभाषा में ब्लैक टी, ग्रीन टी, व्हाइट टी, ऊलोंग टी और कांगड़ा टी जैसी पारंपरिक चाय शामिल हैं।
हर्बल ड्रिंक्स पर रोक क्यों?
अथॉरिटी ने पाया कि कई कंपनियां जड़ी-बूटियों, फूलों या अन्य पौधों से बने पेय पदार्थों को ‘हर्बल टी’, ‘फ्लावर टी’ या ‘रुइबोस टी’ के नाम से बेच रही हैं। चूंकि इनमें कैमेलिया साइनेंसिस का अंश नहीं होता, इसलिए इन्हें चाय कहना अब कानूनन ‘मिसब्रांडिंग’ (गलत लेबलिंग) माना जाएगा।
इस बदलाव के मुख्य बिंदु
- नया नाम: अब हर्बल मिश्रणों को ‘हर्बल इन्फ्यूजन’ (Herbal Infusion) या ‘बोटैनिकल ब्लेंड्स’ के रूप में लेबल करना अनिवार्य होगा।
- ग्रीन टी का दर्जा: शुद्ध ग्रीन टी (जो कैमेलिया साइनेंसिस से बनी है) अभी भी ‘चाय’ ही कहलाएगी, लेकिन बिना चाय पत्ती वाले हर्बल मिश्रणों को इस श्रेणी से बाहर कर दिया गया है।
- उपभोक्ताओं को सुरक्षा: इस कदम का उद्देश्य ग्राहकों को असली चाय और हर्बल काढ़ों के बीच होने वाले भ्रम से बचाना है।
- सख्त कार्रवाई: FSSAI ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और निर्माताओं को तुरंत अपने लेबल बदलने के निर्देश दिए हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
चाय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह भारत की पारंपरिक चाय (जैसे असम और दार्जिलिंग टी) की शुद्धता और वैश्विक प्रतिष्ठा को बनाए रखने में मदद करेगा।

















