Divorce Law Update: पति या पत्नी विदेश में हों तो क्या विदेशी कोर्ट का तलाक भारत में मान्य? हाईकोर्ट का फैसला जानें

वैश्वीकरण के दौर में अब यह एक आम समस्या बन गई है कि पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में रह रहा है और वहां की अदालत से तलाक की डिग्री हासिल कर लेता है, लेकिन क्या ऐसी डिग्री भारत में कानूनी रूप से मान्य है? दिसंबर 2025 तक आए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम फैसलों ने इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है

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Divorce Law Update: पति या पत्नी विदेश में हों तो क्या विदेशी कोर्ट का तलाक भारत में मान्य? हाईकोर्ट का फैसला जानें
Divorce Law Update: पति या पत्नी विदेश में हों तो क्या विदेशी कोर्ट का तलाक भारत में मान्य? हाईकोर्ट का फैसला जानें

वैश्वीकरण के दौर में अब यह एक आम समस्या बन गई है कि पति या पत्नी में से कोई एक विदेश में रह रहा है और वहां की अदालत से तलाक की डिग्री हासिल कर लेता है, लेकिन क्या ऐसी डिग्री भारत में कानूनी रूप से मान्य है? दिसंबर 2025 तक आए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम फैसलों ने इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

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विदेशी तलाक की मान्यता: मुख्य कानूनी बिंदु

हालिया अदालती फैसलों, विशेषकर गुजरात हाईकोर्ट (सितंबर 2025) और दिल्ली हाईकोर्ट (दिसंबर 2025) के निर्देशों के अनुसार, विदेशी कोर्ट का फैसला भारत में तभी लागू होगा जब वह कुछ सख्त शर्तों को पूरा करता हो:

  • आपसी सहमति अनिवार्य: यदि दोनों पक्षों ने विदेशी अदालत की कार्यवाही में स्वेच्छा से भाग लिया है और आपसी सहमति से तलाक लिया है, तो भारतीय अदालतें इसे मान्यता देने में उदारता बरतती हैं।
  • एकपक्षीय फैसला अमान्य: यदि पति या पत्नी ने दूसरे पक्ष को बिना सूचित किए या उसकी गैर-मौजूदगी में (Ex-Parte) विदेशी अदालत से तलाक ले लिया है, तो भारत में उसे ‘अमान्य’ करार दिया जा सकता है।
  • भारतीय कानूनों का पालन: कोर्ट ने साफ किया है कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुई शादी को केवल उन्हीं आधारों पर खत्म किया जा सकता है जो भारतीय कानून में वर्णित हैं। विदेशी अदालतों का ‘Irretrievable Breakdown’ (शादी का पूरी तरह टूटना) वाला आधार भारत में स्वतः प्रभावी नहीं होगा। 

हाईकोर्ट के हालिया फैसले (दिसंबर 2025)

  • गुजरात हाईकोर्ट का कड़ा रुख: कोर्ट ने सितंबर 2025 के अपने आदेश में कहा कि भारत में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई शादी को विदेशी कानून के जरिए मनमाने ढंग से खत्म नहीं किया जा सकता।
  • दिल्ली हाईकोर्ट की राहत: दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आपसी सहमति के मामलों में राहत देते हुए कहा कि यदि दोनों पक्ष राजी हैं, तो एक वर्ष के अलगाव (Separation) की अनिवार्य शर्त को खत्म किया जा सकता है ताकि प्रक्रिया तेज हो सके।

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सावधानी: हो सकती है जेल

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति विदेशी डिग्री के आधार पर भारत में बिना पुष्टि के दूसरी शादी करता है, तो उस पर ‘द्विविवाह’ (Bigamy) का मुकदमा चल सकता है, यदि आप विदेश में हैं और तलाक की प्रक्रिया शुरू करना चाहते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके जीवनसाथी को उचित नोटिस मिले और प्रक्रिया भारतीय विवाह कानूनों के सिद्धांतों का उल्लंघन न करे।अधिक कानूनी जानकारी और सहायता के लिए आप भारत सरकार के विधिक कार्य विभाग (Department of Legal Affairs) की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

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Author
Pinki

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