बिहार सरकार ने जमीन रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। पुराने कागजी घोटालों और दलालों के जाल को तोड़ते हुए अब सब कुछ ऑनलाइन होगा। इससे आम आदमी को सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति मिलेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। यह बदलाव 2025-26 से लागू हो रहा है, जो संपत्ति व्यवस्था को मजबूत बनाएगा।

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डिजिटल सत्यापन का नया नियम
अब रजिस्ट्री के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों को आधार कार्ड से बायोमेट्रिक सत्यापन कराना पड़ेगा। फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और फेस रिकग्निशन से फर्जी दस्तावेजों का अंत हो जाएगा। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क केवल डिजिटल तरीके से जैसे UPI या नेट बैंकिंग से जमा करना होगा। नकद भुगतान पूरी तरह बंद रहेगा, ताकि काला धन रोका जा सके। यह सिस्टम मोबाइल ऐप से घर बैठे काम पूरा करने की सुविधा देगा।
दाखिल-खारिज की समय सीमा
जमीन रजिस्ट्री के ठीक 90 दिनों के अंदर दाखिल-खारिज का आवेदन जमा करना अनिवार्य होगा। देरी होने पर जुर्माना या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। विवादित प्लॉट या बिना साफ टाइटल वाली जमीन पर तुरंत रजिस्ट्री रद्द की जा सकेगी। ग्रामीण इलाकों में अब सीमांकन और नक्शा ऑनलाइन अपलोड होगा, जिससे पुराने रिकॉर्ड आसानी से अपडेट होंगे।
लाभ और जरूरी सलाह
ये नियम भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे। डिजिटल सर्टिफिकेट मिलते ही जमीन का स्टेटस कहीं से भी चेक किया जा सकेगा। किसान और छोटे मालिकों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, क्योंकि प्रक्रिया तेज और सस्ती बनेगी। हालांकि, खरीदने से पहले जमीन की पूरी जांच कर लें – जैसे रोड, स्कूल या धार्मिक स्थल के पास न हो। गलत जानकारी पर रजिस्ट्री अमान्य हो सकती है।
आगे क्या होगा?
सरकार ने सभी जिलों में ट्रेनिंग कैंप लगाने का प्लान बनाया है। जल्द ही सभी पुराने रिकॉर्ड डिजिटाइज हो जाएंगे। यह कदम बिहार को संपत्ति प्रबंधन में देश का लीडर बना देगा। लाखों लोगों को सशक्त बनाने वाले इस फैसले से विकास की नई गति आएगी।

















