OTT Ban: अश्लीलता फैलाने वाले 43 OTT प्लेटफॉर्म्स पर गिरी गाज! सोशल मीडिया के लिए भी आ गए नए सख्त नियम

केंद्र सरकार ने इंटरनेट पर अश्लील और भ्रामक कंटेंट रोकने के लिए IT नियमों को सख्ती से लागू किया है। अब 50 लाख से ज्यादा यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को लोकल अधिकारी नियुक्त कर 72 घंटे में शिकायतों का समाधान करना होगा। वहीं OTT कंटेंट भी IT नियम 2021 के तहत रेगुलेट होगा।

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OTT Ban: अश्लीलता फैलाने वाले 43 OTT प्लेटफॉर्म्स पर गिरी गाज! सोशल मीडिया के लिए भी आ गए नए सख्त नियम

इंटरनेट अब हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है — मनोरंजन से लेकर जानकारी तक, सबकुछ एक क्लिक पर मिल जाता है। लेकिन इसी डिजिटल आज़ादी के साथ सामने आई है एक बड़ी चुनौती — अश्लीलता, फेक कंटेंट और ऑनलाइन शोषण की। इन्हीं मुद्दों को देखते हुए केंद्र सरकार ने इंटरनेट को सुरक्षित और जिम्मेदार बनाने के लिए नए IT नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए कड़े नियम

सरकार ने साफ कहा है कि 50 लाख से अधिक यूजर्स वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, जिन्हें “Significant Social Media Intermediaries” कहा जाता है, को अब लोकल अधिकारी नियुक्त करना और कंप्लायंस रिपोर्ट (Compliance Report) जारी करना अनिवार्य होगा।

इसका मतलब यह है कि Facebook, Instagram, X (Twitter) और YouTube जैसे बड़े प्लेटफॉर्म अब भारत में अपने कामकाज के लिए सीधे जवाबदेह होंगे। यदि कोई यूजर शिकायत करता है, तो प्लेटफॉर्म को 72 घंटों के भीतर कार्रवाई करनी होगी। वहीं, अगर कंटेंट में अश्लीलता या किसी की प्राइवेसी का उल्लंघन है, तो 24 घंटे में उसे हटाना जरूरी होगा।

OTT कंटेंट अब IT नियमों के दायरे में

कई लोगों के मन में यह सवाल था कि Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जाने वाले कंटेंट का रेगुलेशन कौन करता है। इस पर सरकार ने साफ कर दिया है कि OTT कंटेंट CBFC यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के नहीं, बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम 2021 के तहत रेगुलेट होगा।

इन नियमों में कहा गया है कि OTT प्लेटफॉर्म्स को “Code of Ethics” का पालन करना होगा — यानी ऐसा कोई कंटेंट प्रकाशित नहीं किया जा सकता जो कानून का उल्लंघन करे या किसी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाए। इसके साथ ही, कंटेंट को Age‑wise Classification देना आवश्यक है ताकि दर्शकों को पता हो कि कौन‑सा शो किस उम्र के लिए उपयुक्त है।

तीन‑स्तरीय निगरानी व्यवस्था

सरकार ने शिकायतों और कंटेंट की निगरानी के लिए तीन‑स्तरीय ग्रिवेंस सिस्टम (Three‑Tier Grievance System) बनाया है।

  1. पहला स्तर: खुद प्लेटफॉर्म पर — यानी हर OTT और सोशल मीडिया कंपनी को सेल्फ‑रेगुलेशन अपनाना होगा।
  2. दूसरा स्तर: उद्योग के भीतर बने सेल्फ‑रेगुलेटिंग बॉडीज़ द्वारा निगरानी।
  3. तीसरा स्तर: केंद्र सरकार का खुद का ओवरसाइट मैकेनिज्म, जो आवश्यक होने पर सीधे हस्तक्षेप कर सकता है।

मंत्री एल. मुरुगन ने संसद में बताया कि अब तक 43 OTT प्लेटफॉर्म्स की एक्सेस ब्लॉक की जा चुकी है क्योंकि वे खुलेआम अश्लील कंटेंट दिखा रहे थे।

डीपफेक और AI कंटेंट पर भी सख्ती

नए IT एक्ट के तहत अब Deepfake Videos और AI‑Generated Content पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे कंटेंट जो किसी की नकल करते हैं, गुमराह करते हैं या निजता (Privacy) का उल्लंघन करते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई होगी। सरकार ने यह भी कहा कि ये नियम बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। साथ ही, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स (जैसे WhatsApp, Telegram आदि) को कानून लागू करने वाली एजेंसियों की मदद करनी होगी ताकि किसी “Sensitive or Serious Offence” से जुड़े मैसेज के Origin (Source) का पता लगाया जा सके।

तकनीक से निगरानी और जवाबदेही

सरकार का जोर सिर्फ कंट्रोल पर नहीं, बल्कि टेक‑ड्रिवन ट्रांसपेरेंसी पर है। इसलिए जिन कंपनियों के यूजर्स 50 लाख से अधिक हैं, उन्हें अब Automated Tools या AI‑Based Systems लगाना होगा ताकि गैर‑कानूनी कंटेंट को पहचानकर समय रहते रोका जा सके। इसके अलावा, हर प्लेटफॉर्म को अपनी Compliance Report पब्लिश करनी होगी, जिसमें यह बताया जाएगा कि कितनी शिकायतें मिलीं और कैसे उनका समाधान किया गया। यह कदम यूजर्स के बीच Trust और Accountability बढ़ाने की दिशा में अहम है।

नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई

सरकार ने साफ कहा है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म IT नियमों का पालन नहीं करता, तो उसे IT Act की धारा 79 के तहत मिलने वाली छूट नहीं मिलेगी। इसका अर्थ है कि कंपनी पर मुकदमा चलाया जा सकता है या अन्य कानूनी कार्रवाई संभव है। यह प्रावधान प्लेटफॉर्म्स को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य बनाता है।

कुल मिलाकर, सरकार के नए IT नियम इंटरनेट को जिम्मेदार, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम हैं। इससे न केवल सोशल मीडिया और OTT उद्योगों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि यूजर्स को भी यह भरोसा मिलेगा कि उनका डिजिटल स्पेस अब Safe Zone बनता जा रहा है।

Author
Pinki

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