
उत्तर प्रदेश सरकार और परिवहन विभाग ने सड़कों पर बढ़ते हादसों को रोकने के लिए नाबालिग चालकों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, नए आदेशों के मुताबिक, यदि 18 वर्ष से कम उम्र का कोई भी किशोर सड़क पर वाहन (दोपहिया या चौपहिया) चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उसके अभिभावक या वाहन मालिक को जिम्मेदार माना जाएगा।
यह भी देखें: क्या कोई देश दूसरे देश की करेंसी अपना सकता है? ‘Dollarization’ का पूरा खेल समझें
Table of Contents
कड़े दंड का प्रावधान
परिवहन विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के तहत पकड़े जाने पर निम्नलिखित कानूनी कार्रवाई की जाएगी:
- भारी जुर्माना: वाहन स्वामी या पिता पर ₹25,000 का नकद जुर्माना लगाया जाएगा।
- जेल की सजा: नियमों के उल्लंघन पर अभिभावक को 3 साल तक की कैद हो सकती है।
- पंजीकरण रद्द: संबंधित वाहन का रजिस्ट्रेशन (RC) 12 महीने के लिए निरस्त कर दिया जाएगा।
- भविष्य पर संकट: दोषी नाबालिग 25 वर्ष की आयु तक ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनवाने के लिए अपात्र हो जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल के वर्षों में नाबालिगों द्वारा तेज रफ्तार वाहन चलाने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में तेजी आई है, सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम की धारा 199A के तहत यह सख्ती की जा रही है, अधिकारियों का कहना है कि यह कदम किशोरों की सुरक्षा और उनके माता-पिता को जागरूक करने के लिए उठाया गया है।
यह भी देखें: PM Kisan 22nd Installment Update: 2026 में इस दिन आएगी 22वीं किस्त? ₹2000 आएंगे या नहीं, 2 मिनट में स्टेटस चेक करें
1 मार्च 2025 से नियमों में और सख्ती
प्रदेश भर में 1 मार्च 2025 से लागू नए नियमों के तहत सीसीटीवी कैमरों और ई-चालान के जरिए निगरानी तेज कर दी गई है, इसके साथ ही अन्य उल्लंघन जैसे टू-व्हीलर पर तीन सवारी बैठाने पर ₹1,000 और बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर भारी जुर्माने की व्यवस्था भी की गई है।
परिवहन विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन न दें, अन्यथा उन्हें न केवल भारी आर्थिक चपत लगेगी बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

















