
नियमित ब्याज, कम जोखिम और बैंक की गारंटी के कारण बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक FD को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन जैसे ही FD से मिलने वाला ब्याज बढ़ता है, TDS (Tax Deducted at Source) को लेकर भ्रम की स्थिति बन जाती है।
अक्सर सवाल उठता है — क्या 1 लाख रुपये से ज्यादा FD ब्याज पर सीनियर सिटीजन्स को TDS देना जरूरी है?
आइए पूरे नियम, अपवाद और टैक्स प्लानिंग के विकल्पों को विस्तार से समझते हैं।
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TDS क्या है और FD ब्याज से इसका क्या संबंध?
TDS कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं होता, बल्कि आयकर (Income Tax) का वह हिस्सा है जिसे बैंक या वित्तीय संस्थान आपकी ओर से पहले ही सरकार को जमा कर देता है।
FD पर मिलने वाला ब्याज Income from Other Sources के तहत टैक्सेबल होता है और इसी पर बैंक TDS काटता है। बाद में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय इसे एडजस्ट या रिफंड के रूप में क्लेम किया जा सकता है।
Senior Citizens के लिए FD ब्याज पर 1 लाख रुपये की खास सीमा
इनकम टैक्स नियमों के अनुसार:
- सीनियर सिटीजन्स (60 वर्ष या उससे अधिक) के लिए
- एक बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा FD से
- पूरे वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये तक की ब्याज आय पर TDS नहीं काटा जाता
यह नियम सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक सभी पर समान रूप से लागू होता है।
ध्यान देने वाली अहम बात
यह 1 लाख रुपये की सीमा सिर्फ FD और RD (Recurring Deposit) से मिलने वाले ब्याज पर लागू होती है।
- Savings Account Interest के लिए यह सीमा सिर्फ ₹10,000 है।
कब कटेगा TDS और कब नहीं?
Tax2win के CEO और Co-Founder, चार्टर्ड अकाउंटेंट अभिषेक सोनी के अनुसार:
- अगर किसी सीनियर सिटीजन को एक बैंक से सालभर में FD ब्याज ₹1 लाख या उससे कम मिलता है → कोई TDS नहीं
- लेकिन जैसे ही उसी बैंक से ब्याज ₹1 लाख से ऊपर जाता है → TDS लागू
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए FD पर औसतन ब्याज दर 8% है।
- करीब ₹12–13 लाख की FD पर सालाना ब्याज लगभग ₹1 लाख बनता है
- इस सीमा तक बैंक TDS नहीं काटेगा
- लेकिन निवेश राशि बढ़ते ही ब्याज ₹1 लाख पार करेगा और TDS कटना शुरू हो जाएगा
Multiple Banks Strategy: स्मार्ट निवेश से TDS से बचाव
चार्टर्ड अकाउंटेंट जिगर सुबा (JC Suba & Associates) बताते हैं कि:
अगर कोई सीनियर सिटीजन अलग-अलग बैंकों में FD करता है और
- हर बैंक से ब्याज ₹1 लाख से कम रहता है
तो किसी भी बैंक द्वारा TDS नहीं काटा जाएगा, भले ही कुल ब्याज आय ज्यादा हो।
उदाहरण
- HDFC Bank से FD ब्याज: ₹90,000
- SBI से FD ब्याज: ₹80,000
- कुल ब्याज आय: ₹1,70,000
इसके बावजूद कोई TDS नहीं, क्योंकि किसी भी एक बैंक में सीमा पार नहीं हुई।
यह एक प्रभावी Tax Planning Strategy है, जिससे सीनियर सिटीजन अपने कैश फ्लो को बेहतर बना सकते हैं।
Form 15H: TDS से बचने का कानूनी तरीका
अगर किसी सीनियर सिटीजन की FD से ब्याज ₹1 लाख से ज्यादा है, तब भी एक विकल्प मौजूद है — Form 15H।
Form 15H क्या है?
- यह एक Self-Declaration Form है
- जिसे सीनियर सिटीजन बैंक को जमा करते हैं
- ताकि FD ब्याज पर TDS न काटा जाए
लेकिन जरूरी शर्त क्या है?
Form 15H तभी मान्य होता है जब:
- आपकी कुल टैक्स योग्य आय
- Basic Exemption Limit (टैक्स छूट सीमा) से कम हो
- यानी वास्तव में आपको इनकम टैक्स देना ही न बनता हो
अगर आपकी कुल आय टैक्स स्लैब में आती है, तो
सिर्फ Form 15H जमा करने से टैक्स से बचा नहीं जा सकता।
याद रखें ये जरूरी बातें
- TDS कटना और टैक्स देना दो अलग चीजें हैं
- अगर आपकी आय टैक्सेबल नहीं है, तो TDS रिफंड लिया जा सकता है
- सही FD Distribution, Form 15H और समय पर ITR Filing से
सीनियर सिटीजन्स अपने रिटायरमेंट इनकम को ज्यादा प्रभावी ढंग से मैनेज कर सकते हैं

















