
पिछले कुछ हफ्तों में सोना और चांदी दोनों ने ऐसे रिकॉर्ड तोड़े हैं कि आम लोगों के लिए इन्हें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। चाहे बात शादी की तैयारियों की हो या निवेश की प्लानिंग की हर किसी की नज़र इस वक्त गोल्ड के तेजी पकड़ते दामों पर टिकी है। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये उछाल क्यों नहीं थम रहा।
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रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा सोना
मंडे को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों ने नया कीर्तिमान बना दिया। फरवरी डिलीवरी वाला गोल्ड लगभग 1874 रुपये बढ़कर 1,35,496 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया जो अब तक का उच्च स्तर है। सिर्फ एक हफ्ते में सोने की कीमतें करीब 3,000 रुपये तक बढ़ चुकी हैं। हालांकि मंगलवार को थोड़ी गिरावट देखने को मिली और सोना लगभग 133,670 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा, लेकिन यह अब भी बेहद ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।
चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार
सोने की तरह चांदी ने भी रिकॉर्ड रफ्तार दिखाई। मार्च 2026 कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी का भाव सोमवार को 198,106 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। सिर्फ पिछले सात दिनों में ही चांदी 9,400 रुपये महंगी हो चुकी है। मंगलवार को यह हल्की गिरावट के साथ 196,882 रुपये प्रति किलो तक आई, लेकिन इसकी ऊंचाई अभी भी निवेशकों का ध्यान खींच रही है।
क्यों बढ़े दाम? जानिए असली कारण
भारत में सोने-चांदी की कीमतें पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर करती हैं। जब दुनिया में सोना महंगा होता है, तो उसका असर सीधे भारत में भी दिखता है। इसके अलावा, डॉलर और रुपया के बीच का फर्क, आयात पर लगने वाला टैक्स, और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
इस समय विश्व अर्थव्यवस्था अस्थिरता झेल रही है। कई देशों के बीच युद्ध जैसे हालात हैं, वैश्विक विकास की गति धीमी हो रही है और निवेशकों में डर फैला हुआ है। ऐसे माहौल में सोना एक सुरक्षित निवेश के रूप में सबसे भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। बड़े निवेशक और सेंट्रल बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं ताकि उनकी संपत्ति सुरक्षित रहे और यही खरीददारी कीमतों को और ऊपर धकेल रही है।
RBI भी खरीद रहा है अधिक सोना
भारत का रिजर्व बैंक (RBI) भी पीछे नहीं है। मार्च 2025 तक RBI ने अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाकर 879 टन कर लिया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 57 टन ज्यादा है। केंद्र सरकार का मानना है कि इस कदम से रुपये की मजबूती बढ़ती है और देश की विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति ज्यादा स्थिर रहती है। RBI की यह नीति दर्शाती है कि भारत भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता से खुद को सुरक्षित कर रहा है।
सोना अब सिर्फ गहना नहीं, एक स्मार्ट निवेश
भारत में सोना पारंपरिक रूप से गहने के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब यह निवेश का अहम जरिया बन गया है। जब भी इसके दाम बढ़ते हैं, तो जिन लोगों के पास पहले से सोना है, उनकी कुल संपत्ति की कीमत अपने आप बढ़ जाती है। यही कारण है कि लोग शेयर बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए गोल्ड में पैसा लगाना ज़्यादा सुरक्षित मानते हैं।
टैक्स घटाकर थोड़ी राहत
साल 2024 में सरकार ने सोने के शौकीनों और आम निवेशकों को थोड़ी राहत दी थी। गोल्ड इंपोर्ट पर टैक्स को 15% से घटाकर 6% कर दिया गया। इसके साथ ही सरकार फिजिकल गोल्ड के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसी योजनाओं पर ज़ोर दे रही है। इससे न सिर्फ सुरक्षित निवेश को बढ़ावा मिलता है, बल्कि देश के सोने के आयात भार में भी कमी आती है।
क्या अभी गोल्ड में निवेश करना सही है?
सरकार और वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में निवेश करने से पहले सोच-समझकर फैसला लेना चाहिए। कीमतें फिलहाल रिकॉर्ड स्तर पर हैं, इसलिए जल्दबाजी न करें। अगर निवेश करना चाहते हैं तो थोड़ी गिरावट या स्थिरता आने का इंतजार करना बेहतर होगा। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए गोल्ड अब भी मजबूत विकल्प है, लेकिन इसे अपने बजट और वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार बैलेंस करना ज़रूरी है।

















