
भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जिससे जुड़े कई दिलचस्प किस्से और तथ्य अक्सर हमें हैरान कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है, जहाँ सप्ताह के एक खास दिन ट्रेनें पूरी तरह ‘मौन’ रहती हैं? जी हां, पश्चिम बंगाल का ‘चौरिचा स्टेशन’ (Chauricha Station) अपनी एक अनूठी परंपरा के लिए पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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रविवार को हॉर्न बजाना है वर्जित
पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले में स्थित चौरिचा रेलवे स्टेशन पर हर रविवार को सन्नाटा पसरा रहता है। यहाँ से गुजरने वाली कोई भी ट्रेन रविवार के दिन हॉर्न नहीं बजाती, रेलवे के नियमों में इस तरह का बदलाव आमतौर पर देखने को नहीं मिलता, लेकिन इस स्टेशन पर यह सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है।
आस्था और सम्मान की अनूठी मिसाल
इस अनोखी परंपरा के पीछे का कारण कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक आस्था है, दरअसल, इस स्टेशन के बेहद करीब ‘संत बाबा साहेब’ का एक प्रसिद्ध आश्रम स्थित है, रविवार के दिन इस आश्रम में विशेष पूजा-अर्चना, कीर्तन और ध्यान के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।
श्रद्धालुओं की शांति और ध्यान में कोई खलल न पड़े, इसी का सम्मान करते हुए रेलवे प्रशासन ने रविवार के दिन इस क्षेत्र में हॉर्न न बजाने का निर्देश दिया है, लोको पायलट भी आश्रम की सीमा से गुजरते समय इस नियम का कड़ाई से पालन करते हैं।
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पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
आस्था और अनुशासन का यह संगम चौरिचा स्टेशन को अन्य स्टेशनों से अलग बनाता है, स्थानीय निवासियों के लिए यह गर्व की बात है कि रेलवे उनकी भावनाओं का इतना सम्मान करता है, यदि आप भी इस शांत और अनूठे अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो अपनी यात्रा की योजना भारतीय रेलवे (IRCTC) के माध्यम से बना सकते हैं।
यह स्टेशन हमें सिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और प्राचीन आस्था एक साथ तालमेल बिठाकर चल सकते हैं।

















