
जब आप किसी नए देश की यात्रा करते हैं और अपनी करेंसी बदलवाते हैं, तो कई बार हाथ में आने वाले मोटे नोटों का ढेर देखकर लगता है कि आप अचानक अमीर हो गए हैं। लेकिन जैसे ही चीजों के दाम सामने आते हैं, पता चलता है कि ये नोट असल में उतने काम के नहीं हैं। यही फर्क दिखाता है कि किसी करेंसी की मजबूती या कमजोरी का मतलब क्या होता है।
कुछ देशों की आर्थिक नीतियां, राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती महंगाई उनकी मुद्रा को कमजोर बना देती हैं। आइए जानते हैं दुनिया की ऐसी ही 6 करेंसी के बारे में जिनकी कीमत सबसे कम है और इसके पीछे के कारण भी।
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1. लेबनानी पाउंड
लेबनान (Lebanon) की करेंसी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी कीमत का बड़ा हिस्सा खो दिया है। देश में राजनीतिक अस्थिरता, गहरी मंदी और बढ़ती महंगाई (Hyperinflation) ने लोगों की स्थिति बेहद कठिन बना दी है। सरकारी और बाजार दर में बड़ा अंतर है यानी जो रेट सरकार बताती है, असल में बाजार में उससे कहीं कमजोर करेंसी चल रही होती है। यात्रियों के नजरिए से तो ढेरों नोट मिलना अच्छा लगता है, लेकिन वहां के आम नागरिकों के लिए यही नोट उनके खर्च में कोई राहत नहीं देते।
2. ईरानियन रियाल
ईरान (Iran) की मुद्रा ईरानियन रियाल (Iranian Rial) लंबे समय से लगातार गिरावट में है। इसकी मुख्य वजहों में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध, निरंतर महंगाई और घटता विदेशी व्यापार शामिल हैं। यहां रहने वाले लोगों के लिए खरीदारी की क्षमता लगातार घट रही है। दूसरी ओर, विदेशी यात्रियों को थोड़े से डॉलर के बदले बहुत सारे रियाल मिलते हैं, जिससे उन्हें यह भ्रम होता है कि वे वहां बहुत कम पैसों में सब कुछ खरीद सकेंगे लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है।
3. वियतनामीज डोंग
वियतनाम (Vietnam) की करेंसी डोंग (Dong) को दुनिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में गिना जाता है। हालांकि यहां की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, लेकिन सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जानबूझकर करेंसी को कमजोर रखा है ताकि विदेशी देशों के लिए वियतनाम में उत्पादन और खरीदारी सस्ती पड़े। सैलानियों के लिए ये देश अब भी बेहद किफायती है यहां खाना, रहना और घूमना सब कुछ बजट-फ्रेंडली माना जाता है।
4. लाओशियन किप
लाओस (Laos) की करेंसी लाओशियन किप (Kip) किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय करेंसी से जुड़ी नहीं है, जिससे इसकी वैल्यू काफी अस्थिर रहती है।
देश पर भारी कर्ज, सीमित निर्यात और धीमी आर्थिक प्रगति ने इसकी स्थिति कमजोर कर दी है।
यात्रियों को यहां रोजमर्रा की खरीदारी के लिए भी मोटे नोटों के पुलिंदे साथ रखने पड़ते हैं, जो देखने में तो बहुत लगते हैं लेकिन असल कीमत मामूली होती है।
5. इंडोनेशियन रुपिया
इंडोनेशिया (Indonesia) तेजी से विकास कर रहा देश है, लेकिन उसकी करेंसी रुपिया (Rupiah) अब भी कमजोर बनी हुई है।
इसका कारण है महंगाई, आयात पर निर्भरता, बड़ी जनसंख्या और अधूरी बुनियादी सुविधाएं। हालांकि यहां रहना और घूमना अब भी किफायती है, लेकिन करेंसी की वैल्यू इतनी कम है कि हर खरीद में बड़े नोटों की जरूरत पड़ती है, जिनसे जेब भारी जरूर लगती है, पर असल मूल्य कम होता है।
6. उज्बेकिस्तानी सोम
उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने पिछले कुछ वर्षों में कई आर्थिक सुधार किए हैं, फिर भी उज्बेक सोम (Som) की कीमत अब भी काफी नीचे है।
पुराने आर्थिक दबाव, लंबे समय तक चलती महंगाई और सीमित निर्यात क्षमता ने इसकी वैल्यू को संभलने नहीं दिया। हालांकि सुधारों का असर धीरे-धीरे दिख रहा है, लेकिन वैश्विक स्तर पर सोम अभी भी कमजोर करेंसी की सूची में है।
क्यों कमजोर पड़ती हैं करेंसी
किसी देश की मुद्रा उसकी अर्थव्यवस्था, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय विश्वास पर निर्भर करती है। जब किसी देश में लगातार महंगाई बढ़ती है, सरकार पर कर्ज चढ़ जाता है, राजनीतिक अस्थिरता होती है या विदेशी निवेश कम आता है, तो उस देश की करेंसी की कीमत गिरने लगती है। कमजोर मुद्रा का सीधा मतलब है विदेश से आने वाला सामान महंगा, लेकिन उस देश का निर्यात सस्ता हो जाता है।

















