UP शुरू होगी महायोजना, 8349 एकड़ भूमि अधिग्रहण! मुआवजे में मिलेंगे करोड़ों, देखें

बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की महायोजना-2045 से क्षेत्र में बड़ा औद्योगिक बदलाव आने वाला है। 8349 एकड़ भूमि पर बन रहे इस प्रोजेक्ट में सड़क, बिजली और रेलवे कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी गई है। झांसी तक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के विस्तार और अप्रैल 2026 से औद्योगिक भूखंड आवंटन की योजना से रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

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बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) अब क्षेत्र के आर्थिक भविष्य को नई दिशा देने जा रहा है। महायोजना-2045 के तहत करीब 8349 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, ताकि यहां एक सुव्यवस्थित औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा सके। इसका उद्देश्य केवल उद्योगों को बसाना नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड को उत्तर भारत का उभरता औद्योगिक हब बनाना है।

ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का विस्तार

औद्योगिक विकास के लिए सड़क संपर्क सबसे अहम कड़ी होती है। इसी सोच के तहत आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को अब झांसी तक विस्तारित किया जाएगा। इससे क्षेत्र न केवल उत्तर भारत के बड़े शहरों से बेहतर जुड़ाव पाएगा, बल्कि आने वाले निवेशकों को भी सुगमता मिलेगी। यह विस्तार बुंदेलखंड को दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से सीधे जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मार्च 2026 तक भूमि अधिग्रहण पूरा करने का लक्ष्य

मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई प्रोजेक्ट मानीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) की बैठक में तय किया गया कि भूमि अधिग्रहण का कार्य अगले वर्ष मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए हर महीने के हिसाब से प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को यह भी सख्त हिदायत दी गई है कि कोई भी कार्य निर्धारित समय से आगे न जाए और गुणवत्ता पर भी खास ध्यान दिया जाए।

जलापूर्ति और विद्युत व्यवस्था को लेकर ठोस कदम

बीडा क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए एक आधुनिक व्यवस्था तैयार की जा रही है। इसके तहत राइजिंग मेन पम्प स्टेशन और ओएंडएम (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) के कार्य जल निगम द्वारा ही संचालित किए जाएंगे। इसके लिए एमओयू की प्रक्रिया चल रही है और पंपिंग स्टेशन के लिए जमीन चिह्नित भी कर ली गई है।
ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी सरकार ने बड़ी तैयारी की है—15 मेगावाट बिजली आपूर्ति की परियोजना पहले ही स्वीकृत हो चुकी है, जबकि बाकी 40 मेगावाट की डीपीआर तैयार की जा रही है। इससे औद्योगिक इकाइयों को अबाध बिजली उपलब्ध कराना संभव होगा।

मुख्य सड़कों और अन्य आधारभूत ढांचे का विकास

परियोजना क्षेत्र में 60 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क की डीपीआर मंजूर हो चुकी है। बाकी सड़कों की रिपोर्ट इसी माह पूरी होने वाली है। इसका अर्थ है कि अगले कुछ महीनों में पूरा औद्योगिक क्षेत्र एक स्मार्ट लेआउट में विकसित होगा, जहां सड़क, जल, बिजली और अन्य सुविधाएँ एक साथ आगे बढ़ेंगी। यह ढांचा आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।

रेलवे कनेक्टिविटी से बढ़ेगी औद्योगिक संभावना

दिल्ली-चेन्नई चतुर्थ रेलवे लाइन और नया रेलवे स्टेशन बीडा क्षेत्र से होकर गुजरे, इसके लिए भारतीय रेलवे द्वारा सर्वे और एलाइनमेंट तय करने की प्रक्रिया जारी है। यह रेलवे नेटवर्क उद्योगों की रीढ़ का काम करेगा, जिससे माल ढुलाई आसान होगी और क्षेत्र में निवेशकों की रुचि और बढ़ेगी।

ललितपुर फार्मा पार्क और औद्योगिक भूखंड आवंटन योजना

बैठक में ललितपुर फार्मा पार्क की भी गहन समीक्षा की गई। यह प्रोजेक्ट बुंदेलखंड को फार्मा सेक्टर में नए आयाम देने वाला साबित हो सकता है। अधिकारियों ने बताया कि औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से शुरू कर दी जाएगी। इससे उद्योगपतियों को अपने प्रोजेक्ट जल्दी शुरू करने का अवसर मिलेगा।

बुंदेलखंड लंबे समय से विकास की प्यास झेल रहा है, लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। बीडा की महायोजना-2045 से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया सहारा मिलेगा। सड़क, बिजली, जल, और रेलवे जैसी सुविधाओं के साथ यह क्षेत्र उत्तर भारत के सबसे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक जोनों में अपनी पहचान बना सकता है।

Author
Pinki

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