
भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक अधिकारों के बावजूद, देश में कुछ ऐसे पर्यटन स्थल और प्रतिष्ठान मौजूद हैं जहां भारतीय नागरिकों का प्रवेश प्रतिबंधित (Banned) है, इनमें से 3 स्थान अकेले तमिलनाडु में स्थित हैं, 2025 की नवीनतम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन जगहों पर भारतीयों की एंट्री को लेकर अक्सर विवाद होते रहते हैं।
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तमिलनाडु की 3 प्रमुख विवादित जगहें
- रेड लॉलीपॉप हॉस्टल, चेन्नई: चेन्नई के मध्य में स्थित यह हॉस्टल अपनी सख्त “नो इंडियन पॉलिसी” (No Indian Policy) के लिए चर्चा में रहता है, यहाँ केवल विदेशी पासपोर्ट धारकों या प्रवासियों (Expats) को ही ठहरने की अनुमति दी जाती है।
- ब्रॉडलैंड्स लॉज/होटल, चेन्नई: ब्रिटिश काल की वास्तुकला वाले इस पुराने लॉज में भी कथित तौर पर भारतीयों का प्रवेश वर्जित है। यहाँ चेक-इन के लिए विदेशी पासपोर्ट होना अनिवार्य शर्त मानी जाती है।
- रशियन कॉलोनी, कुडनकुलम: कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास स्थित इस आवासीय कॉलोनी में केवल रूसी नागरिक और परमाणु वैज्ञानिक ही रह सकते हैं। सुरक्षा कारणों से आम भारतीयों का यहाँ जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
भारत के अन्य 3 स्थान
- फ्री कसोल कैफे, हिमाचल प्रदेश: कसोल के इस प्रसिद्ध कैफे ने 2015 में तब सुर्खियां बटोरी थीं जब इसने भारतीय पर्यटकों को सेवा देने से इनकार कर दिया था। यह कैफे मुख्य रूप से इजरायली पर्यटकों को प्राथमिकता देता है।
- गोवा के “फॉरेनर्स-ओनली” बीचेस: गोवा के कुछ चुनिंदा तटों और समुद्री किनारों पर बने शैक (shacks) मालिकों द्वारा केवल विदेशी पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जाता है। स्थानीय मालिकों का तर्क है कि इससे उनके विदेशी मेहमानों की निजता बनी रहती है।
- पुडुचेरी के “फॉरेनर्स-ओनली” बीचेस और रेस्टोरेंट्स: गोवा की तर्ज पर ही पुडुचेरी में भी कुछ ऐसे निजी समुद्री तट और रेस्टोरेंट हैं जहाँ भारतीयों की एंट्री बैन है। यहाँ की वास्तुकला और माहौल पूरी तरह विदेशी पर्यटकों के अनुकूल रखा गया है।
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इन प्रतिबंधों में से अधिकांश स्थानीय मालिकों की अपनी निजी नीतियां हैं और इनमें से कुछ को भेदभाव के आरोपों के कारण कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है।

















