
दुनिया में देशों की संपन्नता और विपन्नता का आकलन करने के लिए अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञों द्वारा ‘जीडीपी’ (सकल घरेलू उत्पाद) को सबसे सटीक पैमाना माना जाता है, हाल ही में 2026 के आर्थिक आंकड़ों के आधार पर दुनिया के सबसे गरीब देशों की सूची सामने आई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की एक चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश करती है।
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कैसे तय होता है कौन सा देश है गरीब?
किसी देश की गरीबी या अमीरी का निर्धारण उस देश की जीडीपी (GDP) के जरिए होता है, विशेष रूप से, ‘प्रति व्यक्ति जीडीपी’ (GDP Per Capita) यह दर्शाती है कि उस देश में एक औसत व्यक्ति की आर्थिक स्थिति क्या है, सरल शब्दों में कहें तो, किसी देश की कुल जीडीपी में वहां की जनसंख्या का भाग देने पर जो राशि प्राप्त होती है, वह प्रति व्यक्ति आय कहलाती है, जिस देश की प्रति व्यक्ति जीडीपी जितनी कम होती है, उसे आर्थिक रूप से उतना ही पिछड़ा या गरीब माना जाता है।
दुनिया के 10 सबसे गरीब देश (2026 के अनुमान)
इस सूची में अधिकांश देश अफ्रीका महाद्वीप से हैं, जो लंबे समय से गृहयुद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं:
- दक्षिण सूडान: $455 प्रति व्यक्ति जीडीपी के साथ दुनिया का सबसे गरीब देश।
- बुरुंडी: $916
- मध्य अफ्रीकी गणराज्य: $1,123
- लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो: $1,552
- मोजाम्बिक: $1,649
- नाइजर: $1,675
- मलावी: $1,712
- लाइबेरिया: $1,882
- मेडागास्कर: $1,979
- यमन: $1,996
भारत की स्थिति: कहाँ खड़ा है हमारा देश?
जब हम भारत की बात करते हैं, तो तस्वीर काफी अलग नजर आती है। भारत दुनिया के 10 सबसे गरीब देशों की सूची से कोसों दूर है, 2026 में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रुप में मजबूती से खड़ा है।
हालांकि, बड़ी जनसंख्या के कारण जब ‘प्रति व्यक्ति आय’ की बात आती है, तो भारत मध्यम श्रेणी के देशों में आता है, 2026 के अनुमानों के अनुसार, भारत का प्रति व्यक्ति जीडीपी (PPP) लगभग $12,964 है, यह दुनिया के सबसे गरीब देशों (जैसे दक्षिण सूडान) की तुलना में लगभग 28 गुना अधिक है, जो भारत की निरंतर बढ़ती आर्थिक ताकत को दर्शाता है।

















