अपने प्रिय पिता को खोना जीवन का सबसे बड़ा दुख होता है। लेकिन अगर उस दुःख से उबरने के बीच अचानक पता चले कि पिता के खाते पर लाखों का लोन बकाया है, वह भी उस लोन की जानकारी परिवार को न होने पर तो यह सदमा और भी गहरा हो जाता है। हाल ही में एक सोशल प्लेटफॉर्म पर एक यूजर ने अपनी इसी दुखद कहानी साझा की, जिसने कानूनी उत्तराधिकार और कर्ज़ भरने की जिम्मेदारियों को लेकर लोगों के बीच बहस छेड़ दी है।

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पिता के निधन के दो हफ्ते बाद लगा बड़ा झटका
एक यूजर ने बताया कि उनके पिता पंचायत सचिव थे और कुछ ही दिन पहले वे अपनी मां के साथ बैंक गए थे ताकि उनके पिता का एसबीआई खाता बंद किया जा सके। वहां जाकर पता चला कि पिता ने 18.5 लाख रुपए का पर्सनल लोन लिया था, जिसमें से 7.9 लाख रुपए ही चुका पाए थे और अभी 10.6 लाख रुपए कर्ज रह गया था। लोन की मासिक किश्त करीब 36 हजार रुपए थी, जो बेटे की सैलरी का लगभग 90% हिस्सा बनती थी। बेटे का कहना था कि वह इतनी बड़ी राशि वहन करने में असमर्थ है।
क्या उत्तराधिकारी को भरना पड़ता है कर्ज?
बैंक अधिकारी ने बताया कि इस लोन पर कोई बीमा कवर नहीं था, इसलिए कानून के तहत कानूनी उत्तराधिकारी पर लोन का भुगतान करना अनिवार्य होता है। लेकिन जब बेटे ने लोन की पूरी जानकारी मांगी, तो अधिकारी ने लोन एग्रीमेंट देने से इनकार कर दिया और कहा कि ‘पहले पूरा लोन चुका दो, फिर जानकारी देंगे’। इस तरह का जवाब बेटे को संदेहास्पद लगा, जिससे उसने सारी बातचीत ईमेल के जरिए फिक्स करने का फैसला किया।
सोशल मीडिया पर मंथन: उत्तराधिकारी हैं जिम्मेदार या नहीं?
कुछ रेदित यूजर्स ने कानूनी सलाह देते हुए कहा कि अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन की जिम्मेदारी और दायित्व वारिसों पर सीधे नहीं होता है। यह लोन केवल उस संपत्ति से वसूला जा सकता है जो मृतक के नाम हो। यदि कोई संपत्ति न हो, तो बैंक लोन को बट्टे खाते में डाल देता है। केवल दो ही परिस्थिति में वारिस ज़िम्मेदार होते हैं, जब वे को-अप्लिकेंट या गारंटर के रूप में शामिल हों, जो कि इस मामले में नहीं था।
क्या बैंक पेंशन या पीएफ से काट सकता है भुगतान?
यूजर ने यह भी सवाल उठाया कि क्या बैंक पेंशन या पीएफ से लोन की किश्त काट सकते हैं? जवाब है कि नहीं, क्योंकि पेंशन या पीएफ का लाभ नामांकित व्यक्ति को मिलता है, और इन्हें लोन की वसूली में उपयोग नहीं किया जा सकता।
यह कहानी दिखाती है कि परिवारों को वित्तीय मामलों में पूरी जागरूकता और सतर्कता बरतनी कितनी ज़रूरी है, खासकर तब जब परिवार के मुखिया के बाद उनकी संपत्तियां या कर्ज़ जुड़े हों। कानूनी सलाह लेना आवश्यक है ताकि उत्तराधिकारी अनावश्यक वित्तीय दायित्वों से बच सकें।
अपने पिता को खोना ही दिल तोड़ देने वाला होता है, लेकिन सोचिए, इस सदमे से उबर भी न पाए हों और अचानक बैंक जाकर पता चले कि पिता पर लाखों का लोन बकाया है…वह भी ऐसा लोन, जिसके बारे में परिवार को कभी बताया ही नहीं गया था.

















