
अगर आप अपनी जमीन या कोई अन्य अचल संपत्ति (Property) बेचने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है, प्रॉपर्टी की बिक्री से होने वाला मुनाफा केवल आपकी जेब नहीं भरता, बल्कि उस पर भारी-भरकम ‘कैपिटल गेन टैक्स’ की देनदारी भी बनती है, यदि आपने नियमों की अनदेखी की, तो आपको टैक्स के रूप में लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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होल्डिंग पीरियड का रखें ध्यान: कब लगेगा कितना टैक्स?
टैक्स की गणना इस बात पर निर्भर करती है कि जमीन आपके पास कितने समय तक रही:
- शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): अगर आप खरीद के 24 महीने के भीतर जमीन बेचते हैं, तो होने वाला लाभ आपकी सालाना आय में जोड़ा जाएगा। इस पर आपके लागू इनकम टैक्स स्लैब (जैसे 20% या 30%) के हिसाब से टैक्स देना होगा।
- लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG): 2 साल से अधिक समय तक जमीन रखने के बाद बेचने पर इसे लॉन्ग-टर्म माना जाता है। नए नियमों के मुताबिक, अब रियल एस्टेट पर 12.5% की दर से फ्लैट टैक्स लगता है (बिना इंडेक्सेशन लाभ के)।
लाखों का टैक्स बचाने के ‘मास्टर स्ट्रोक’
सरकार टैक्स बचाने के लिए निवेश के कुछ विकल्प भी देती है। आप इन कानूनी तरीकों से अपनी देनदारी शून्य कर सकते हैं:
- नया घर खरीदें (धारा 54F): यदि आपने खाली जमीन बेची है, तो उस मुनाफे से आप नया रिहायशी घर खरीद सकते हैं या बना सकते हैं। आयकर विभाग के नियमों के तहत, यह निवेश एक निश्चित समय सीमा के भीतर करना आवश्यक है।
- 54EC बॉन्ड्स में निवेश: मुनाफे की राशि को आप सरकारी बॉन्ड्स (जैसे NHAI या REC) में निवेश कर सकते हैं। इसमें निवेश की अधिकतम सीमा ₹50 लाख है और यह बिक्री के 6 महीने के भीतर करना होता है।
- कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (CGAS): अगर आपको उपयुक्त प्रॉपर्टी नहीं मिल रही है, तो टैक्स से बचने के लिए मुनाफे की राशि को किसी भी अधिकृत बैंक के कैपिटल गेन अकाउंट में जमा कर दें।
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इन बारीकियों को न करें नजरअंदाज
- TDS की अनिवार्यता: अगर आपकी प्रॉपर्टी की डील ₹50 लाख से अधिक की है, तो खरीदार के लिए 1% TDS काटना और उसे सरकार के पास जमा करना अनिवार्य है। विक्रेता के तौर पर आपको इसका सर्टिफिकेट (Form 16B) जरूर लेना चाहिए।
- सर्किल रेट का खेल: कभी भी जमीन को उसके सरकारी ‘सर्किल रेट’ से कम कीमत पर न दिखाएं। यदि आप ऐसा करते हैं, तो टैक्स की गणना बाजार भाव के बजाय सर्किल रेट पर ही की जाएगी, जिससे आपको अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है।
जमीन के सुधार (जैसे बाउंड्री वॉल या भराव) पर किए गए खर्चों के बिल हमेशा संभाल कर रखें, इन्हें आप अपनी लागत में जोड़कर कुल मुनाफे को कम दिखा सकते हैं, जिससे टैक्स का बोझ घट जाएगा, किसी भी बड़े लेनदेन से पहले टैक्स एक्सपर्ट या CA की सलाह लेना फायदेमंद रहता है।

















