
यह धारणा कि दौड़ने से घुटनों के जोड़ (knee joints) खराब हो जाते हैं या ‘घिस’ जाते हैं, एक लंबे समय से चला आ रहा मिथक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और हालिया वैज्ञानिक अध्ययनों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार, यदि सही तकनीक और सावधानी बरती जाए, तो नियमित और संतुलित दौड़ वास्तव में घुटनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
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चिकित्सा विज्ञान का क्या है कहना?
हड्डी रोग विशेषज्ञों (ऑर्थोपेडिक सर्जन) का मानना है कि दौड़ने की गतिविधि घुटनों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें मजबूत बनाती है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा किए गए कई शोधों से यह बात सामने आई है कि गतिहीन जीवन शैली (sedentary lifestyle) जीने वाले लोगों की तुलना में नियमित धावकों में ऑस्टियोआर्थराइटिस (गठिया) का खतरा कम होता है।
कार्टिलेज पर सकारात्मक प्रभाव
घुटने के जोड़ में कार्टिलेज (उपास्थि) एक कुशन की तरह काम करता है। दौड़ने के दौरान जब जोड़ों पर दबाव पड़ता है, तो इससे कार्टिलेज में रक्त का प्रवाह और पोषक तत्वों का संचरण (circulation) बेहतर होता है। यह प्रक्रिया कार्टिलेज को पोषण देती है, जिससे वे अधिक लचीले और मजबूत बनते हैं। डॉक्टर इसे ‘जॉइंट हेल्थ का बूस्टर’ मानते हैं।
सूजन और वजन नियंत्रण में भूमिका
दौड़ने से शरीर का वजन नियंत्रित रहता है, जो घुटनों पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम करता है। मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस का एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा, व्यायाम से शरीर में सूजन-रोधी (anti-inflammatory) प्रभाव पैदा होते हैं, जो जोड़ों को दीर्घकालिक नुकसान से बचाते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
हालांकि दौड़ना फायदेमंद है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि चोटों से बचने के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं:
- हमेशा अच्छे कुशनिंग वाले उपयुक्त जूते पहनकर ही दौड़ें।
- दौड़ने की सही तकनीक सीखें ताकि जोड़ों पर अनावश्यक तनाव न पड़े।
- यदि दौड़ते समय जोड़ों में तेज या लगातार दर्द हो, तो तुरंत रुकें और किसी विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक सर्जन से परामर्श लें।
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विज्ञान और चिकित्सा जगत इस बात की पुष्टि करता है कि संयमित और सही तरीके से दौड़ना आपके घुटनों को घिसता नहीं है, बल्कि उन्हें स्वस्थ और क्रियाशील बनाए रखता है।

















