
हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में घर के भीतर तस्वीरों और मूर्तियों के स्थान को लेकर विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं, वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, देवी-देवताओं और पितरों (पूर्वजों) की तस्वीरें यदि सही दिशा में न हों, तो यह घर की सुख-शांति को भंग कर सकती हैं, साल 2025 में भी घर की सकारात्मकता बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य माना जा रहा है।
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पितरों की तस्वीर के लिए वास्तु नियम
- सही दिशा: वास्तु के अनुसार, पितरों की तस्वीर हमेशा उत्तर दिशा की दीवार पर लगानी चाहिए ताकि उनका मुख दक्षिण की ओर रहे। कुछ विशेषज्ञ दक्षिण-पश्चिम दीवार को भी इसके लिए उपयुक्त मानते हैं।
- पूजा घर से दूरी: पूर्वजों की फोटो को कभी भी मंदिर या देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साथ नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने से घर में ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है और ‘देव दोष’ लगने की संभावना रहती है।
- बेडरूम और किचन वर्जित: शयनकक्ष (बेडरूम) और रसोईघर में पितरों की तस्वीरें लगाना अशुभ माना जाता है, इससे परिवार में तनाव और गृह-क्लेश बढ़ सकता है。
- जीवित सदस्यों के साथ न रखें: पितरों की तस्वीर कभी भी घर के जीवित सदस्यों की फोटो के साथ नहीं लगानी चाहिए, माना जाता है कि इससे जीवित व्यक्ति के स्वास्थ्य और आयु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
देवी-देवताओं की तस्वीर लगाने के नियम
- मुख की दिशा: पूजा करते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, इसलिए मूर्तियों की स्थापना इसी आधार पर करें।
- सौम्य रूप को प्राथमिकता: घर में हमेशा देवताओं के शांत और आशीर्वाद देते हुए स्वरूप की तस्वीर लगाएं। उग्र या रौद्र रूप वाली मूर्तियां (जैसे तांडव करते शिव या मां काली का विकराल रूप) घर में अशांति ला सकती हैं।
- आमने-सामने न हों: एक ही देवता की दो तस्वीरें या मूर्तियां कभी भी एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं होनी चाहिए।
- साफ-सफाई: तस्वीरों पर धूल जमना या उनका फटना नकारात्मकता का संकेत है। खंडित मूर्तियों या फटी हुई तस्वीरों को तुरंत हटाकर किसी पवित्र नदी में विसर्जित कर देना चाहिए।
वास्तु विशेषज्ञों का दावा है कि इन नियमों की अनदेखी से पितृ दोष और घर में दरिद्रता आ सकती है, घर के मुख्य द्वार पर भी पूर्वजों की फोटो लगाने से बचना चाहिए।
वास्तु और ज्योतिष संबंधी अधिक जानकारी के लिए आप Astrosage या AstroTalk जैसी आधिकारिक वेबसाइटों का संदर्भ ले सकते हैं।

















