
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसंबर 2025 में दो सहकारी बैंकों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम उनकी कमजोर वित्तीय स्थिति (poor financial health) और supervisory concerns को देखते हुए उठाया गया है। इन बैंकों में शामिल हैं गुवाहाटी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक लिमिटेड और लोकनेते आर.डी. (अप्पा) क्षीरसागर सहकारी बैंक।
RBI का मानना है कि ये प्रतिबंध जरूरी हैं ताकि बैंकों की स्थिरता पर असर न पड़े और जमाकर्ताओं (depositors) के हितों की सुरक्षा की जा सके।
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गुवाहाटी को-ऑपरेटिव अर्बन बैंक पर प्रतिबंध
आसाम के गुवाहाटी में स्थित इस बैंक पर 17 दिसंबर 2025 से 6 महीने के लिए कई तरह की रोक लगा दी गई है। बैंक की खराब आर्थिक स्थिति और नियामक सख्ती को ध्यान में रखते हुए RBI ने निर्देश दिया है कि यह बैंक अब कोई नया लोन जारी नहीं करेगा, नए डिपॉज़िट स्वीकार नहीं करेगा और न ही किसी नई निवेश गतिविधि में भाग ले सकेगा।
निकासी सीमा तय
RBI ने बैंक ग्राहकों के लिए ₹35,000 की निकासी सीमा तय की है। यानी ग्राहक अपने खातों (saving या current) से अधिकतम 35 हजार रुपये तक ही निकाल सकते हैं। यह कदम तत्कालीन नकदी संकट को रोकने और बैंक की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए उठाया गया है।
लोकनेते आर.डी. क्षीरसागर सहकारी बैंक पर पूरी रोक
नासिक (महाराष्ट्र) स्थित लोकनेते आर.डी. (अप्पा) क्षीरसागर सहकारी बैंक पर भी RBI ने 16 दिसंबर 2025 से 6 महीने के लिए प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि गुवाहाटी बैंक के विपरीत, इस बैंक के खाताधारकों को अपने खातों से कोई भी राशि निकालने की अनुमति नहीं है।
वित्तीय गिरावट और निगरानी चिंताएं
यह बैंक पिछले कुछ समय से वित्तीय संकट में फंसा हुआ था। लगातार बढ़ते non-performing assets (NPAs) और कमजोर पूंजी आधार के कारण इसकी स्थिति चिंताजनक हो गई थी। इसलिए RBI ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए यह कदम उठाया ताकि जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा की जा सके।
जमाकर्ताओं के लिए राहत की उम्मीद
इन दोनों बैंकों के खाताधारकों के लिए एक राहत की बात यह है कि वे Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) स्कीम के तहत ₹5 लाख तक की बीमा सुरक्षा के पात्र हैं। इसका अर्थ है कि यदि किसी कारणवश बैंक अपनी देनदारियां पूरी नहीं कर पाता, तब भी ग्राहकों को अधिकतम 5 लाख रुपये तक की राशि DICGC द्वारा दी जाएगी।
RBI ने यह भी साफ किया है कि ये प्रतिबंध केवल corrective action का हिस्सा हैं, न कि बैंकों का लाइसेंस रद्द करने का निर्णय। यदि बैंक अपनी स्थिति सुधार लेते हैं, तो प्रतिबंधों को जल्द ही हटाया जा सकता है।
बैंक के संचालन पर सीमित छूट
भले ही RBI ने वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाई है, लेकिन बैंकों को अपने जरूरी खर्च जैसे कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, किराया और सुरक्षा संबंधी भुगतानों की अनुमति दी गई है। इस कदम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिबंधों के दौरान भी बैंक की बुनियादी गतिविधियां रुकें नहीं और कर्मचारियों पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े।
क्या कहते हैं आर्थिक विशेषज्ञ?
वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय RBI की सख्त लेकिन जिम्मेदार नीति को दर्शाता है। हाल के वर्षों में कई छोटे सहकारी बैंक वित्तीय संकट के कारण बंद हुए या मर्ज किए गए। इसलिए अब RBI यह सुनिश्चित कर रहा है कि ऐसे मामलों में early corrective action लिया जाए ताकि जमाकर्ताओं को नुकसान न उठाना पड़े।
आगे की राह
RBI द्वारा उठाए गए ये कदम संकेत देते हैं कि भारत का केंद्रीय बैंक अब risk management और financial transparency को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करना चाहता। दोनों बैंकों को अपने वित्तीय रिकॉर्ड सुधारने, पारदर्शी रिपोर्टिंग बढ़ाने और ग्राहक भरोसे को फिर से हासिल करने की जरूरत होगी।
संभावना है कि अगर वे अपने capital base और loan recovery सिस्टम को मजबूत करते हैं, तो RBI इन प्रतिबंधों को छह महीने से पहले भी हटा सकता है। फिलहाल, जमाकर्ताओं के लिए सबसे बड़ी राहत यही है कि उनके पैसे DICGC बीमा के दायरे में सुरक्षित हैं।

















