
भारतीय कृषि में तकनीक का समावेश किसानों की तकदीर बदल रहा है, इस कड़ी में एक ऐसी मशीन चर्चा का विषय बनी हुई है जिसे किसान ‘बाहुबली’ मशीन कह रहे हैं, हम बात कर रहे हैं मल्टीक्रॉप थ्रेशर (Multicrop Thresher) की, जो न केवल खेती की लागत घटा रही है, बल्कि कम समय में अधिक काम करके किसानों की आय दोगुनी करने का जरिया बन रही है।
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एक मशीन, अनेक काम: क्यों है यह ‘बाहुबली’?
मल्टीक्रॉप थ्रेशर की सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुमुखी प्रतिभा है। परंपरागत थ्रेशर जहां सीमित फसलों के लिए उपयोग किए जाते हैं, वहीं यह बाहुबली मशीन गेहूं, सरसों, सोयाबीन, मक्का, मूंग, उड़द और चने सहित लगभग 50 तरह की फसलों की मड़ाई (Threshing) करने में सक्षम है।
मुख्य विशेषताएं जो इसे बनाती हैं खास:
- इस मशीन को आधुनिक तकनीक से डिजाइन किया गया है, जिससे ट्रैक्टर पर इंजन का दबाव कम पड़ता है और डीजल की खपत में काफी कमी आती है।
- यह अनाज और भूसे को इतनी सफाई से अलग करती है कि मंडी में किसान को उपज का बेहतर दाम मिलता है।
- घंटों का काम मिनटों में होने के कारण मजदूरों पर निर्भरता कम हो जाती है।
सरकार का बड़ा फैसला: 50% तक की सब्सिडी
किसानों को आधुनिक यंत्रों से जोड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें ‘कृषि यंत्रीकरण पर उप-मिशन’ (SMAM) के तहत भारी अनुदान दे रही हैं 2025 में भी इस योजना के तहत मल्टीक्रॉप थ्रेशर की खरीद पर 40% से 50% तक की सब्सिडी दी जा रही है।
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विशेष रुप से महिला किसानों, अनुसूचित जाति/जनजाति और छोटे सीमांत किसानों को अधिकतम सब्सिडी का लाभ मिलता है, इससे लाखों की मशीन अब आधे दाम पर किसानों के दरवाजे तक पहुंच रही है।
कैसे करें आवेदन?
अगर आप भी इस बाहुबली मशीन को सब्सिडी पर खरीदना चाहते हैं, तो इन आधिकारिक पोर्टल्स के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:
- यूपी एग्रीकल्चर पोर्टल (upagriculture.com) पर पंजीकरण करें।
- ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरें।
- अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (CSC) पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बाहुबली’ मल्टीक्रॉप थ्रेशर जैसे यंत्रों का उपयोग खेती को घाटे के सौदे से निकालकर मुनाफे की ओर ले जा रहा है कम लागत और अधिक पैदावार ही 2025 में किसानों की समृद्धि का मूल मंत्र साबित होगी।

















