
देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा अभेद्य होती है। जहां भी पीएम मोदी का काफिला निकलता है, सुरक्षा का ऐसा घेरा होता है जिसे भेदना नामुमकिन है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो शख्स प्रधानमंत्री की बुलेटप्रूफ गाड़ी को चलाता है, उसकी सैलरी कितनी होगी? वर्ष 2025 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री के ड्राइवर का वेतन और उन्हें मिलने वाली सुविधाएं किसी बड़े अधिकारी से कम नहीं हैं।
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लाखों में है पैकेज, पे-बैंड लेवल 5 के तहत मिलता है वेतन
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में तैनात ड्राइवरों का वेतन सरकारी पे-मैट्रिक्स के पे-बैंड लेवल 5 के तहत निर्धारित किया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री के ड्राइवर की सैलरी ₹29,200 से लेकर ₹92,300 प्रति माह तक हो सकती है। अगर इनके औसत मूल वेतन (Basic Pay) की बात करें, तो यह लगभग ₹42,000 से ₹45,000 के बीच बैठता है। इसके अलावा, इन्हें कई प्रकार के विशेष भत्ते भी दिए जाते हैं, जो इनके कुल वेतन को काफी आकर्षक बना देते हैं।
मिसाइल और हमले के बीच भी सुरक्षित निकालने की ट्रेनिंग
प्रधानमंत्री का ड्राइवर कोई साधारण ड्राइवर नहीं होता। ये स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का हिस्सा होते हैं। इन्हें न केवल गाड़ी चलाने की, बल्कि युद्ध स्तर की ट्रेनिंग दी जाती है।
- इवेसिव मैन्युवर्स: इन्हें किसी भी हमले के दौरान विपरीत दिशा में या खतरनाक मोड़ों पर तेज रफ्तार से गाड़ी निकालने में महारत हासिल होती है।
- सुरक्षा कवर: ये ड्राइवर आपातकालीन स्थिति में खुद भी मोर्चा संभालने के लिए प्रशिक्षित होते हैं।
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वेतन के साथ मिलती हैं ये शाही सुविधाएं
प्रधानमंत्री के ड्राइवर को भारत सरकार की ओर से उच्च स्तरीय सुविधाएं दी जाती हैं:
- महंगाई और यात्रा भत्ता (DA/TA): केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार समय-समय पर बढ़ोतरी के साथ भत्ते मिलते हैं।
- चिकित्सा सुविधा: ड्राइवर और उनके परिवार को CGHS के तहत देश के बेहतरीन अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।
- सरकारी आवास: इन्हें लुटियंस दिल्ली या उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्रों में सरकारी आवास आवंटित किए जाते हैं।
- बोनस और बीमा: जोखिम भरा काम होने के कारण इनका बीमा कवर बहुत ऊंचा होता है।
कैसे होता है चयन?
अगर आप सोच रहे हैं कि इसके लिए कोई सीधी भर्ती निकलती है, तो आप गलत हैं। पीएम के ड्राइवर बनने की प्रक्रिया बेहद जटिल है:
- सबसे पहले उम्मीदवार का CRPF, BSF, CISF या पुलिस जैसे सुरक्षा बलों में होना अनिवार्य है।
- वहां से बेहतरीन रिकॉर्ड वाले जवानों को चुना जाता है और फिर उनकी SPG ट्रेनिंग होती है।
- कड़ी स्क्रीनिंग, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही किसी को प्रधानमंत्री के काफिले का हिस्सा बनने का मौका मिलता है।
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प्रधानमंत्री के ड्राइवर की सैलरी भले ही सुनने में सामान्य लगे, लेकिन उनकी जिम्मेदारी, पद की गरिमा और मिलने वाली सुविधाएं उन्हें बेहद खास बनाती हैं।

















