
पर्सनल लोन आज की जरूरतों को पूरा करने का एक आसान जरिया है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर लोन चुकाने के दौरान कर्जदार की मृत्यु हो जाए, तो बकाया राशि का क्या होता है? क्या बैंक मृतक के परिवार को पैसे चुकाने के लिए मजबूर कर सकता है? 2026 के वर्तमान बैंकिंग नियमों के अनुसार, आइए समझते हैं इसके कानूनी पहलू।
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परिवार पर नहीं डाली जा सकती जिम्मेदारी
पर्सनल लोन एक ‘अनसिक्योर्ड लोन’ (Unsecured Loan) होता है। इसका मतलब है कि यह बिना किसी गारंटी या कोलैटरल (जैसे सोना या जमीन) के दिया जाता है, नियमों के मुताबिक, कर्जदार की मृत्यु के बाद बैंक उसके कानूनी वारिसों या परिवार के सदस्यों से वसूली के लिए दबाव नहीं बना सकते। परिवार के सदस्य कानूनी रूप से इस कर्ज को चुकाने के लिए बाध्य नहीं हैं।
सह-आवेदक (Co-applicant) की भूमिका
अगर लोन लेते समय किसी व्यक्ति ने ‘जॉइंट लोन’ लिया था या कोई सह-आवेदक (Co-applicant) शामिल था, तो नियम बदल जाते हैं। ऐसी स्थिति में, मुख्य कर्जदार की मृत्यु होने पर लोन चुकाने की पूरी जिम्मेदारी दूसरे आवेदक की होती है। बैंक उस सह-आवेदक से बकाया राशि वसूलने का अधिकार रखते हैं।
क्या संपत्ति से हो सकती है वसूली?
हालांकि बैंक परिवार को परेशान नहीं कर सकते, लेकिन यदि मृतक के नाम पर कोई संपत्ति (जैसे बैंक बैलेंस या निवेश) छोड़ी गई है और वह उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित होती है, तो बैंक उस संपत्ति के मूल्य की सीमा तक अपना दावा कर सकते हैं।
लोन इंश्योरेंस: एक बड़ा सुरक्षा चक्र
आजकल अधिकांश बैंक पर्सनल लोन के साथ ‘क्रेडिट प्रोटेक्शन इंश्योरेंस’ का विकल्प देते हैं, यदि कर्जदार ने बीमा लिया है, तो उसकी मृत्यु के बाद बीमा कंपनी बैंक को बकाया राशि का भुगतान करती है, इससे परिवार पर वित्तीय बोझ नहीं आता।
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जब कोई रास्ता न बचे: ‘राइट-ऑफ’
यदि मृतक का कोई सह-आवेदक नहीं है, कोई बीमा नहीं है और न ही कोई संपत्ति है, तो बैंक के पास उस कर्ज को ‘राइट-ऑफ’ (Write-off) करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। इसे बैंक अपने ‘बैट डेब्ट’ (Bad Debt) खाते में डाल देते हैं।
किसी भी वित्तीय संकट से बचने के लिए लोन लेते समय बीमा (Insurance) कवर जरूर लें और नियमों की जानकारी के लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित बैंक के ‘टर्म्स एंड कंडीशंस’ को ध्यान से पढ़ें।

















