
भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया पहल के तहत जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) बनवाने की प्रक्रिया को अब पहले से कहीं अधिक सुगम और पारदर्शी बना दिया है, साल 2026 में लागू नए प्रावधानों के अनुसार, अब नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, नए नियमों का उद्देश्य आम जनता को कागजी कार्रवाई के बोझ से मुक्ति दिलाना है।
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मात्र इन दस्तावेजों की होगी जरुरत
प्रशासन द्वारा दस्तावेजों की सूची को सीमित कर दिया गया है, अब मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं:
- अस्पताल रिकॉर्ड: जन्म के समय मिलने वाला अस्पताल का डिस्चार्ज स्लिप।
- माता-पिता की पहचान: माता और पिता दोनों का आधार कार्ड।
- निवास प्रमाण: बिजली बिल, राशन कार्ड या वोटर आईडी में से कोई एक।
- ऑनलाइन पंजीकरण: आधिकारिक CRS पोर्टल के माध्यम से अब सीधे घर बैठे आवेदन किया जा सकता है।
21 दिन का नियम और ‘सिंगल डॉक्यूमेंट’ की ताकत
नियमों के मुताबिक, जन्म के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना पूरी तरह निःशुल्क है, गौरतलब है कि 1 अक्टूबर 2023 के बाद से जन्म प्रमाण पत्र की अहमियत काफी बढ़ गई है, अब यह स्कूल में प्रवेश, पासपोर्ट आवेदन और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए एक ‘एकल दस्तावेज’ (Single Document) के रुप में मान्य है, जिससे अन्य दस्तावेजों की अनिवार्यता कम हो गई है।
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खो गया है सर्टिफिकेट? घबराएं नहीं, यह है समाधान
अगर आपका बर्थ सर्टिफिकेट खो गया है या फट गया है, तो सरकार ने इसके लिए भी आसान रास्ते तैयार किए हैं:
- यदि आपका रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज है, तो आप संबंधित नगर निगम की वेबसाइट से इसे पुनः डाउनलोड कर सकते हैं।
- अब आप अपने प्रमाण पत्र को DigiLocker पर सुरक्षित रख सकते हैं। यहां उपलब्ध डिजिटल कॉपी को भौतिक प्रति के बराबर ही कानूनी मान्यता प्राप्त है।
- स्थानीय निकाय कार्यालय में एक साधारण आवेदन और निर्धारित मामूली शुल्क जमा कर डुप्लीकेट कॉपी प्राप्त की जा सकती है।
देरी से पंजीकरण पर क्या हैं नियम?
यदि किसी कारणवश जन्म के एक वर्ष बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो प्रक्रिया थोड़ी भिन्न होगी, इसके लिए आवेदक को मजिस्ट्रेट से अनुमति और एक हलफनामा (Affidavit) देना होगा, विशेषज्ञों की सलाह है कि भविष्य की जटिलताओं से बचने के लिए जन्म के तुरंत बाद पंजीकरण अवश्य कराएं।

















