महाशिवरात्रि 15 को या 16 फरवरी को? कैलेंडर में बदल गई तारीख! जान लीजिए पूजा का सबसे शुभ ‘निशिता काल’ मुहूर्त

इस साल महाशिवरात्रि की तारीख और शुभ मुहूर्त में बदलाव! पढ़ें कब रखें व्रत, कब करें रातभर पूजा और जानें निशिता काल का सबसे पवित्र समय, ताकि आपका व्रत और भक्ति बनें पूर्ण।

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महाशिवरात्रि 15 को या 16 फरवरी को? कैलेंडर में बदल गई तारीख! जान लीजिए पूजा का सबसे शुभ 'निशिता काल' मुहूर्त
महाशिवरात्रि 15 को या 16 फरवरी को? कैलेंडर में बदल गई तारीख! जान लीजिए पूजा का सबसे शुभ ‘निशिता काल’ मुहूर्त

हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक, महाशिवरात्रि-Mahashivratri, इस साल 2026 में कब मनाई जाएगी, इसको लेकर शिव भक्तों में उत्सुकता है। यह त्योहार भगवान शिव-Shiva और माता पार्वती-Parvati के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। दुनिया भर में लाखों भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं।

महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन-Falgun मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी-Chaturdashi तिथि को मनाई जाती है। खास बात यह है कि मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर होता है। मासिक शिवरात्रि हर महीने आती है, लेकिन फाल्गुन मास की यह चतुर्दशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।

महाशिवरात्रि 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी 15 फरवरी 2026 को शाम 5:04 बजे से आरंभ होगी और 16 फरवरी 2026 को शाम 5:34 बजे तक रहेगी।

इस साल, महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी 2026, रविवार को रखा जाएगा।

भक्त इस दिन रातभर जागरण करते हुए शिवलिंग का अभिषेक-Abhishek और रुद्राभिषेक-Rudrabhishek जैसे पारंपरिक अनुष्ठान करते हैं।

महाशिवरात्रि 2026 पूजा शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि पूजा के दौरान विशेष मुहूर्त का पालन करना शुभ माना जाता है। इस साल के प्रमुख मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

  • रात्रि प्रथम प्रहर: शाम 06:39 बजे से रात 09:45 बजे तक
  • रात्रि तृतीय प्रहर: 16 फरवरी मध्यरात्रि 12:52 बजे से 03:59 बजे तक
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी प्रात:काल 03:59 बजे से सुबह 07:06 बजे तक
  • निशिता काल पूजा समय: 16 फरवरी मध्यरात्रि 12:28 बजे से 01:17 बजे तक

भक्त इन समयों में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत का पालन करते हैं

महाशिवरात्रि 2026 व्रत पारण का समय

महाशिवरात्रि व्रत का पारण-Paran अगले दिन 16 फरवरी 2026 को किया जाएगा।

  • पारण आरंभ: सुबह 07:06 बजे
  • पारण समाप्त: दोपहर 03:46 बजे

व्रत तोड़ने से पहले भोलेनाथ की पूजा और भोग लगाने की परंपरा है। सबसे पहले बेर या प्रसाद-Prasad ग्रहण किया जाता है, उसके बाद सात्विक आहार-Ann या अन्य सात्विक भोजन लिया जाता है।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसे लेकर कई मान्यताएं हैं:

  1. एक परंपरा के अनुसार, इस रात भगवान शिव ने ब्रह्मांड के कल्याण-Kalyan के लिए तांडव-Tandav किया था।
  2. एक और मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था।

इसलिए महाशिवरात्रि को शिव-Shiva और शक्ति-Shakti के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन किए गए उपाय और पूजा से ग्रह दोष-Grah Dosh कम करने में भी मदद मिलती है।

महाशिवरात्रि व्रत की विधि

  • व्रत के दौरान भक्त दिनभर निर्जला उपवास-Fasting रखते हैं।
  • रात में शिवलिंग का अभिषेक और रुद्राभिषेक किया जाता है।
  • भक्त ध्यान-Meditation और भजन-Bhajan करते हैं।
  • दूसरे दिन पारण-Paran के समय सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है।

महाशिवरात्रि की रात जागरण और भजन-कीर्तन-Kirtan का विशेष महत्व है।

महाशिवरात्रि 2026: विशेष टिप्स

  • भगवान शिव के लिए दूध-Milk, जल-Water और बेलपत्र-Bel Patra का भोग अर्पित करें।
  • शिव मंत्र का जाप-Jap करना व्रत के पुण्य-Punya को और बढ़ाता है।
  • इस दिन किए गए उपवास और पूजा से जीवन में शांति और मानसिक स्थिरता आती है।
Author
Pinki

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