
उत्तर प्रदेश के कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में आवारा कुत्तों के हमलों पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने एक बेहद सख्त और अनोखा आदेश जारी किया है, इस आदेश के तहत, बार-बार इंसानों को काटने वाले खूंखार कुत्तों को “उम्रकैद” (आजीवन कारावास) की सजा दी जाएगी।
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आखिर क्यों और कैसे मिली सजा?
उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग द्वारा सितंबर 2025 में जारी नई गाइडलाइंस के अनुसार, खूंखार कुत्तों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं:
- यदि कोई कुत्ता दूसरी बार किसी इंसान को काटता है, तो उसे स्थायी रूप से एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर में कैद कर दिया जाएगा, ऐसे कुत्तों को दोबारा कभी समाज में या सड़कों पर नहीं छोड़ा जाएगा।
- पहली बार हमला करने पर कुत्ते को 10 दिनों के लिए निगरानी में रखा जाएगा, उसकी नसबंदी की जाएगी और एक माइक्रोचिप लगाई जाएगी ताकि भविष्य में उसकी पहचान की जा सके।
- यह तय करने के लिए कि हमला “बिना उकसावे” (unprovoked) के हुआ है, तीन सदस्यों की एक समिति (पशु चिकित्सक, नगर निगम अधिकारी और डॉग बिहेवियर एक्सपर्ट) जांच करेगी।
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सजा से बचने का क्या है रास्ता?
उम्रकैद काट रहे कुत्ते को केवल तभी रिहा किया जा सकता है जब कोई व्यक्ति उसे गोद (Adopt) लेने के लिए तैयार हो। गोद लेने वाले व्यक्ति को एक हलफनामा (Affidavit) देना होगा कि वह कुत्ते को कभी सड़कों पर नहीं छोड़ेगा।
कानपुर में कार्रवाई शुरु
कानपुर में इस नियम के तहत कई खूंखार कुत्तों को पकड़कर पहले ही एबीसी सेंटर में “उम्रकैद” के लिए भेज दिया गया है, यह कदम सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों और राज्य में बढ़ते डॉग बाइट के मामलों को देखते हुए लिया गया है।

















