सर्दियों की दस्तक के साथ ही छात्रों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। जनवरी 2026 में ठंड का असर इतना जबरदस्त रहने की उम्मीद है कि कई राज्यों में स्कूल और कॉलेज 24 से 28 जनवरी तक पूरी तरह बंद रह सकते हैं। इससे बच्चों को पांच लगातार दिनों का ब्रेक मिलेगा, जो पढ़ाई की थकान मिटाने और धमाल मचाने का सुनहरा मौका बनेगा। नया साल barely शुरू हुआ है और पहले ही इतना बड़ा सरप्राइज!

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सर्द हवाओं और कोहरे का डर क्यों बना रहा है लंबा ब्रेक
उत्तर भारत में जनवरी का आखिरी हफ्ता ठंड के चरम का समय होता है। तापमान जमकर गिरता है, रातें सिहरन भरी और दिन भी ठंडे। घना कोहरा सड़कों पर खतरा पैदा कर देता है, जबकि शीतलहरें सर्दी-खांसी, बुखार और फ्लू जैसी बीमारियां फैला देती हैं। छोटे बच्चों के लिए सुबह स्कूल पहुंचना जोखिम भरा साबित होता है।
मौसम विशेषज्ञों की मानें तो 2026 में हालात पिछले सालों जैसे ही रहेंगे, इसलिए शिक्षा विभाग सावधानी बरतते हुए छुट्टियां बढ़ा सकता है। अगर कोहरा ज्यादा छाया तो ब्रेक फरवरी तक खिंच भी सकता है। यह फैसला पूरी तरह बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर लिया जाता है।
उत्तर के राज्यों में सबसे ज्यादा असर, ये स्टेट्स टॉप पर
सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाके होते हैं। उत्तर प्रदेश से लेकर हिमाचल तक ठंड का प्रकोप चरम पर पहुंच जाता है। यहां स्कूलों में विंटर वेकेशन का सिलसिला दिसंबर अंत या जनवरी शुरूआत से ही चल पड़ता है। पंजाब और हरियाणा के खेतों में शीतलहर चलने लगती है, राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में भी रातें बर्फीली हो जाती हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में तो बर्फबारी भी आम है। इन सबकी वजह से राज्य सरकारें 20 जनवरी के आसपास ब्रेक घोषित कर देती हैं, जो महीने भर तक चल सकती हैं। 24-28 जनवरी इस ब्रेक का कोर पार्ट बन जाता है, जिससे लाखों छात्र घरों में एंजॉय करते नजर आते हैं।
सरकारी स्कूलों का सख्त नियम, प्राइवेट में फ्लेक्सिबिलिटी
सरकारी स्कूलों में सब कुछ सिस्टमैटिक होता है। मौसम विभाग की चेतावनी मिलते ही शिक्षा विभाग मीटिंग करता है और पूरे जिले या राज्य के लिए छुट्टी का आदेश जारी हो जाता है। 24 जनवरी से शुरू होकर 28 तक सभी सरकारी संस्थान बंद रहेंगे। दूसरी तरफ प्राइवेट और कॉन्वेंट स्कूल मैनेजमेंट अपने हिसाब से फैसला लेते हैं। कई बार ये सरकारी ऑर्डर से पहले ही बच्चों को घर भेज देते हैं या ब्रेक को 10-15 दिनों तक लंबा खींच देते हैं। नतीजा? कुछ बच्चे ज्यादा दिनों तक फ्री रहते हैं।
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कॉलेज गाइज को भी मिलेगा चिल टाइम
स्कूल के अलावा कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स भी राहत की सांस लेंगे। सेमेस्टर एग्जाम्स खत्म होने के बाद विंटर ब्रेक ऑटोमैटिक शुरू हो जाता है। ठंड ज्यादा होने पर क्लासेस पोस्टपोन या ऑनलाइन मोड पर शिफ्ट कर दी जाती हैं। हालांकि हर यूनिवर्सिटी का शेड्यूल अलग होता है, लेकिन जनवरी अंत में ब्रेक तय माना जा सकता है।
बच्चों और पैरेंट्स के लिए सुपर बेनिफिट्स
ये छुट्टियां बच्चों को रिचार्ज करने का मौका देती हैं। लगातार क्लासेस, असाइनमेंट्स और टेस्ट्स के बाद वे खेल सकते हैं, हॉबीज निभा सकते हैं या फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। योग, म्यूजिक या इंडोर गेम्स से मेंटल हेल्थ बेहतर होती है। पैरेंट्स के लिए भी वरदान है – ऑफिस के बाद बच्चों के साथ पिकनिक, रिश्तेदारों का दौरा या घर पर रेस्ट। सबसे बड़ा प्लस पॉइंट: बीमार होने का डर खत्म।
ध्यान दें, हर जगह अलग नियम
छुट्टियां लोकल मौसम पर निर्भर करती हैं, इसलिए राज्य-जिला स्तर पर चेक करें। स्कूल ऐप, वेबसाइट या ग्रुप्स पर ऑफिशियल अनाउंसमेंट ही मानें। अफवाहों से बचें, वरना प्लानिंग बिगड़ सकती है। जनवरी 2026 छात्रों का फेवरेट महीना बनने वाली है!

















