
केंद्र सरकार की डॉ. अंबेडकर योजना के तहत अंतरजातीय विवाह पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि ₹2.5 लाख तय है, हालांकि, देश के विभिन्न राज्यों ने इस सामाजिक पहल को बढ़ावा देने के लिए अपने स्थानीय स्तर पर योजनाओं में संशोधन किया है, इसी क्रम में, राजस्थान सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रोत्साहन राशि को दोगुना कर दिया है।
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मुख्य अपडेट
- राजस्थान सरकार ने ‘डॉ. सविता बेन अंबेडकर अंतरजातीय विवाह योजना’ के तहत दी जाने वाली राशि को ₹5 लाख से बढ़ाकर सीधा ₹10 लाख कर दिया है। यह फैसला राज्य में अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
- हिमाचल प्रदेश में भी राशि बढ़ाने की खबरें हैं, जहां इसे ₹50,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख किया जा रहा है। बिहार सरकार वर्तमान में ₹1 लाख की सहायता प्रदान करती है।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का प्राथमिक लक्ष्य जातिगत भेदभाव को मिटाना और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना है, यह योजना उन जोड़ों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जहां जीवनसाथी में से एक अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से होता है और दूसरा गैर-अनुसूचित जाति समुदाय से।
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पात्रता और शर्तें
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ सामान्य शर्तें हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
- विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 या विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत कानूनी रूप से पंजीकृत होना चाहिए।
- यह सहायता आमतौर पर युगल की पहली शादी के लिए ही मान्य होती है।
- आवेदक को शादी के एक निश्चित समय सीमा (आमतौर पर एक वर्ष) के भीतर आवेदन करना होता है।
इस योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए लाभार्थी माई स्कीम की वेबसाइट या अपने संबंधित राज्य के समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

















