
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर जारी तनातनी अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंच गई है, साल 2026 की शुरुआत के साथ ही भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए हिमालय की गोद में चल रहे चार विशाल हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स को लेकर सख्त रुख अपनाया है, केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए ‘नॉन-नेगोशिएबल’ डेडलाइन जारी कर दी है, जिससे पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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पाकल दुल (Pakal Dul) – 1000 मेगावाट
यह चिनाब की सहायक नदी मारुसुदर पर बन रहा भारत का पहला बड़ा ‘स्टोरेज’ प्रोजेक्ट है।
- महत्व: स्टोरेज प्रोजेक्ट होने के नाते भारत के पास पहली बार चिनाब बेसिन में पानी को जमा करने की क्षमता होगी।
- डेडलाइन: सरकार ने इसे दिसंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने का लक्ष्य दिया है।
किरू (Kiru) – 624 मेगावाट
किश्तवाड़ जिले में स्थित यह प्रोजेक्ट चिनाब नदी पर बनाया जा रहा है।
- रणनीतिक लाभ: यह परियोजना पाकल दुल के ठीक नीचे स्थित है, जिससे भारत को पानी के बहाव के प्रबंधन पर दोहरा नियंत्रण प्राप्त होगा।
- डेडलाइन: इसके मुख्य बांध और पावर हाउस का काम दिसंबर 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
रतले (Ratle) – 850 मेगावाट
यह चिनाब नदी पर स्थित सबसे विवादास्पद प्रोजेक्ट रहा है, जिसका पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कड़ा विरोध किया है।
- ताजा स्थिति: विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के बावजूद भारत ने इसके निर्माण को ‘फास्ट-ट्रैक’ कर दिया है। 2026 में इसका निर्माण कार्य अपने चरम पर रहने वाला है।
क्वार (Kwar) – 540 मेगावाट
किरू और पाकल दुल के करीब स्थित इस प्रोजेक्ट को ऊर्जा के साथ-साथ जल नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- लक्ष्य: हालांकि इसकी अंतिम डेडलाइन 2028 है, लेकिन बुनियादी ढांचे को 2026 के अंत तक तैयार करने का आदेश है ताकि पाकिस्तान की ओर जाने वाले अतिरिक्त जल को मोड़ा जा सके।
पाकिस्तान पर इसका असर क्या होगा?
भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 1960 की सिंधु जल संधि को लेकर अब कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
- पानी का नियंत्रण: इन बांधों के जरिए भारत के पास पश्चिमी नदियों के पानी को नियंत्रित करने की क्षमता होगी, जो पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है।
- संधि का भविष्य: भारत ने हाल ही में संधि की समीक्षा के लिए नोटिस भी जारी किया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले समय में पाकिस्तान को मिलने वाले पानी के कोटे में संभावित बदलाव हो सकते हैं।
हिमालय में चल रहे ये प्रोजेक्ट्स न केवल भारत को बिजली में ‘सरप्लस’ बनाएंगे, बल्कि पाकिस्तान के लिए जल उपलब्धता के संबंध में नई स्थितियां भी पैदा कर सकते हैं।

















