
भारत दुनिया के सात देशों के साथ अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिनमें एक अहम नाम भूटान (Bhutan) का है। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित यह छोटा सा हिमालयी देश भले ही क्षेत्रफल में सीमित हो, लेकिन रणनीतिक (Strategic) और भू-राजनीतिक (Geo-Political) दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत और भूटान के बीच करीब 699 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो भारत के असम, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और सिक्किम राज्यों से होकर गुजरती है। दोनों देशों के रिश्ते दशकों से मैत्रीपूर्ण रहे हैं और यही कारण है कि भूटान की सुरक्षा में Indian Army की अहम भूमिका देखने को मिलती है।
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भूटान की सुरक्षा में क्यों मौजूद रहती है Indian Army?
अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर किसी स्वतंत्र देश की सुरक्षा में भारतीय सेना क्यों तैनात रहती है। इसका सीधा जवाब है—भारत-भूटान सुरक्षा समझौता (India-Bhutan Security Agreement)।
साल 1949 में भारत और भूटान के बीच एक ऐतिहासिक संधि हुई थी, जिसके तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) की रक्षा करने का वचन दिया था। इसी समझौते के आधार पर भारत, भूटान को सैन्य सहयोग देता है।
भूटान उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास अपनी वायुसेना (Air Force) और नौसेना (Navy) नहीं है। ऐसे में उसकी सुरक्षा का बड़ा जिम्मा उसकी थलसेना और भारत के सहयोग पर निर्भर करता है। भारतीय सेना न केवल भूटान की सीमाओं की निगरानी में सहयोग करती है, बल्कि उसकी सेना को ट्रेनिंग (Training) और डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (Defence Infrastructure) में भी मदद करती है।
Strategic Importance: भारत के लिए क्यों अहम है भूटान?
वैश्विक राजनीति में भूटान की स्थिति भारत के लिए बेहद संवेदनशील है। भूटान हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण चीन (China) और भारत के बीच एक तरह का बफर स्टेट (Buffer State) माना जाता है।
अगर भूटान की सुरक्षा कमजोर होती है, तो इसका सीधा असर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भारत, भूटान को केवल एक पड़ोसी नहीं बल्कि एक रणनीतिक साझेदार (Strategic Partner) के रूप में देखता है।
China Threat to Bhutan: भूटान के लिए सबसे बड़ा खतरा कौन?
जिस तरह भारत के लिए पाकिस्तान एक सुरक्षा चुनौती है, उसी तरह भूटान के लिए सबसे बड़ा खतरा चीन माना जाता है। भूटान और चीन के बीच लगभग 499 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिस पर कई स्थानों पर आज भी सीमा विवाद बना हुआ है।
इन विवादित इलाकों में सबसे अहम नाम है डोकलाम (Doklam)। डोकलाम क्षेत्र पर चीन और भूटान दोनों अपना-अपना दावा करते हैं। हालांकि, भूटान के दावे के बावजूद चीन समय-समय पर इस इलाके में सड़क और इन्फ्रास्ट्रक्चर (Road & Infrastructure) निर्माण की कोशिश करता रहा है।
Doklam Dispute: जब China के खिलाफ सामने आई Indian Army
डोकलाम विवाद उस समय अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया, जब चीन ने इस क्षेत्र में सड़क निर्माण शुरू किया। भूटान की आपत्ति के बाद Indian Army ने वहां हस्तक्षेप किया और चीन के निर्माण कार्य को रोक दिया।
यह कदम केवल भूटान की सुरक्षा के लिए नहीं था, बल्कि भारत के लिए भी डोकलाम रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
Siliguri Corridor: ‘Chicken Neck’ की सुरक्षा का सवाल
डोकलाम क्षेत्र भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (Siliguri Corridor) के बेहद करीब है, जिसे आम भाषा में ‘चिकन नेक (Chicken Neck)’ कहा जाता है। यह संकरा इलाका भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (North-East India) को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
अगर चीन का इस क्षेत्र पर कब्जा हो जाता है, तो वह सिलीगुड़ी कॉरिडोर को निशाना बना सकता है, जिससे भारत के नॉर्थ-ईस्ट राज्यों की कनेक्टिविटी खतरे में पड़ सकती है। यही कारण है कि भारत, भूटान की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा से जोड़कर देखता है।
Military Cooperation: India-Bhutan Defense Partnership
आज के समय में भारत और भूटान के बीच सैन्य सहयोग केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। भारतीय सेना, भूटान की सेना को आधुनिक हथियार (Modern Weapons), टेक्नोलॉजी (Technology) और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स के जरिए मजबूत बनाने में मदद करती है।
यह साझेदारी दोनों देशों के लिए विन-विन सिचुएशन (Win-Win Situation) है, जिसमें भूटान को सुरक्षा मिलती है और भारत को रणनीतिक स्थिरता।

















