
भारत सरकार ने आगामी जनगणना को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए जनगणना नियम, 1990 में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं, गृह मंत्रालय द्वारा जारी इस नई अधिसूचना के तहत, अब जनगणना प्रक्रिया के दौरान डेटा संग्रह की शुद्धता पर विशेष जोर दिया गया है, नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और गलत जानकारी देने वाले नागरिकों, दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
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अधिकारियों के लिए सख्त निर्देश
नई अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई प्रगणक (Enumerator) या जनगणना अधिकारी किसी नागरिक से ऐसे सवाल पूछता है जो आधिकारिक प्रश्नावली का हिस्सा नहीं हैं, तो इसे सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा, सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
- अधिकारी केवल वही प्रश्न पूछ सकते हैं जो सरकार द्वारा अधिसूचित किए गए हैं।
- किसी भी व्यक्ति पर गलत जानकारी दर्ज कराने या अनुचित दबाव बनाने पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहली बार ‘डिजिटल और स्व-गणना’ का विकल्प
2026 की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप होना है, नागरिक अब सरकारी प्रगणक के घर आने का इंतजार किए बिना Self-Enumeration (स्व-गणना) पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे, यह कदम डेटा में मानवीय त्रुटियों को कम करने और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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नागरिकों की जवाबदेही भी तय
नए नियमों में केवल अधिकारियों पर ही नहीं, बल्कि आम जनता पर भी जिम्मेदारी डाली गई है, यदि कोई नागरिक:
- जानबूझकर गलत जानकारी देता है,
- तथ्यों को छुपाता है, या
- जानकारी देने से पूरी तरह इनकार करता है,
तो उस पर जनगणना अधिनियम के तहत भारी जुर्माना या दंड लगाया जा सकता है।
डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा
सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि जनगणना के माध्यम से एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय विश्लेषण और सरकारी योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा, इसे किसी भी अन्य डेटाबेस के साथ तब तक साझा नहीं किया जाएगा जब तक कानूनन अनिवार्य न हो।
आगामी जनगणना से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और नियमावली को Census India की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है, सरकार का लक्ष्य इस बार शून्य त्रुटि (Zero Error) के साथ जनगणना को संपन्न करना है।

















