कभी ‘वाइकिंग्स’ के नाम से थर्राती थी दुनिया, आज डेनमार्क की सेना इतनी कमजोर क्यों? जानें फायरपावर का सच

एक दौर था जब समुद्र की लहरों पर राज करने वाले 'वाइकिंग्स' (Vikings) के नाम मात्र से दुनिया के ताकतवर साम्राज्य कांपते थे, डेनमार्क का इतिहास उन निडर योद्धाओं से भरा है जिन्होंने यूरोप के बड़े हिस्सों पर अपना प्रभाव जमाया था, लेकिन 2026 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच, आज डेनमार्क की सैन्य शक्ति और उसकी "कमजोर" पड़ती स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं

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कभी 'वाइकिंग्स' के नाम से थर्राती थी दुनिया, आज डेनमार्क की सेना इतनी कमजोर क्यों? जानें फायरपावर का सच
कभी ‘वाइकिंग्स’ के नाम से थर्राती थी दुनिया, आज डेनमार्क की सेना इतनी कमजोर क्यों? जानें फायरपावर का सच

एक दौर था जब समुद्र की लहरों पर राज करने वाले ‘वाइकिंग्स’ (Vikings) के नाम मात्र से दुनिया के ताकतवर साम्राज्य कांपते थे, डेनमार्क का इतिहास उन निडर योद्धाओं से भरा है जिन्होंने यूरोप के बड़े हिस्सों पर अपना प्रभाव जमाया था, लेकिन 2026 की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के बीच, आज डेनमार्क की सैन्य शक्ति और उसकी “कमजोर” पड़ती स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। 

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वाइकिंग विरासत बनाम आधुनिक सेना

ऐतिहासिक रूप से डेनिश वाइकिंग्स अपनी समुद्री युद्ध कला और साहस के लिए प्रसिद्ध थे, हालांकि, आधुनिक काल में डेनमार्क एक शांतिप्रिय और लोक कल्याणकारी राज्य के रूप में उभरा है। जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक शांति और रक्षा बजट में कटौती के कारण डेनमार्क की जमीनी और नौसैनिक क्षमताएं प्रभावित हुई हैं। 

वर्तमान फायरपावर: संख्या और चुनौतियां

हालिया रक्षा आंकड़ों (जनवरी 2026) के अनुसार, डेनमार्क की सैन्य स्थिति कुछ इस प्रकार है:

  • सैनिकों की संख्या: डेनिश सेना के पास लगभग 7,000 से 9,000 पेशेवर सैनिक हैं।
  • हथियारों की कमी: यूक्रेन को भारी मात्रा में सैन्य सहायता और उपकरण भेजने के कारण डेनमार्क के अपने भंडार में गोला-बारूद, हार्डवेयर और स्टाफ की कमी देखी गई है।
  • रक्षा प्रणालियों का अभाव: विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक सेना के आकार को छोटा करने के कारण वर्तमान में डेनमार्क के पास प्रभावी हवाई रक्षा (Air Defence) प्रणालियों और आधुनिक नौसैनिक क्षमताओं की भारी कमी है। 

ग्रीनलैंड और अमेरिका के साथ तनाव (2026 अपडेट) 

डेनमार्क और अमेरिका के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव चरम पर है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जे की इच्छा के बाद डेनमार्क की सुरक्षा तैयारियों की पोल खुल गई है। विश्लेषकों का तर्क है कि अगर सीधे टकराव की नौबत आती है, तो डेनमार्क की सीमित सेना दुनिया की सबसे ताकतवर अमेरिकी सेना के सामने महज कुछ घंटों तक ही टिक सकती है। 

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क्या फिर से ताकतवर बन रहा है डेनमार्क?

अपनी कमजोरियों को भांपते हुए डेनमार्क सरकार ने अब बड़े कदम उठाने शुरू किए हैं:

  • बजट में भारी वृद्धि: 2026 के लिए रक्षा बजट में अतिरिक्त 1.6 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी की गई है, जिससे रक्षा खर्च जीडीपी का 3% हो जाएगा।
  • नया एयर डिफेंस: डेनमार्क ने घोषणा की है कि 2026 से वह अपनी पहली ग्राउंड-बेस्ड एयर डिफेंस सिस्टम का उपयोग शुरू करने की तैयारी में है।
  • ग्रीनलैंड की सुरक्षा: आर्कटिक क्षेत्र और ग्रीनलैंड की निगरानी के लिए ड्रोन, उपग्रह और विशेष नौसैनिक जहाजों पर 2.3 बिलियन डॉलर निवेश करने का समझौता किया गया है। 

वाइकिंग्स के वंशज आज भले ही एक छोटी सेना के मालिक हों, लेकिन बदलते वैश्विक हालातों और रूस-अमेरिका जैसे देशों के साथ बढ़ती तनातनी ने डेनमार्क को फिर से अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है, 2026 का यह साल डेनिश सेना के आधुनिकीकरण के लिए निर्णायक साबित होने वाला है। 

How Strong is Denmark Military Compared to the US
Author
Pinki

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