
आधुनिक दौर में जहां युवा सुरक्षित नौकरी की तलाश में रहते हैं, वहीं कई उद्यमी ऐसे भी हैं जिन्होंने लीक से हटकर जोखिम उठाया और नौकरी छोड़कर अपने घर के छोटे से हिस्से से अपना व्यवसाय शुरु किया, इन कहानियों ने न केवल उन्हें आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि कई अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए।
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देवी प्रसाद जैसे व्यक्तियों की कहानियाँ उन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जो पारंपरिक नौकरी की राह से हटकर अपना खुद का मुकाम बनाना चाहते हैं। पोस्ट ग्रेजुएशन जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद नौकरी में बंधकर काम करना उन्हें रास नहीं आया, जिसके बाद उन्होंने स्वरोजगार का रास्ता चुना।
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अनुभव को बनाया पूंजी
देवी प्रसाद की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण कारक उनका विविध क्षेत्रों में प्राप्त अनुभव रहा। उन्होंने अपने तकनीकी कौशल को पहचाना:
- उन्होंने कई वर्षों तक टीवी रिपेयरिंग के काम में महारत हासिल की, जिससे उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उपकरणों की गहरी समझ मिली।
- ग्रेटर नोएडा की एक प्रमुख गारमेंट फैक्ट्री में ढाई साल तक मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में काम करके उन्होंने कपड़ा उद्योग की मशीनरी, कार्यप्रणाली और उत्पादन प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया।
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20 लाख का किया निवेश
इस बिजनेस की शुरुवात में देवी प्रसाद ने 1 लाख रूपए का निवेश किया था, इसके बाद 7 लाख की मशीन खरीदीं और रॉ मटेरियल का खर्च मिलाकर टोटल 20 लाख रुपए का खर्चा किया, देवी प्रसाद का कहना है कि इस बिजनेस में शानदार प्रॉफिट है, जितना माल बनाते हैं उतनी ही कमाई कर सकते हैं।
खुद के व्यवसाय की ओर कदम
नौकरी की निश्चित आय को छोड़कर खुद का व्यापार शुरू करने का उनका निर्णय साहसिक था, उन्होंने अपने इन्हीं अनुभवों को अपनी नई व्यावसायिक यात्रा की नींव बनाया।

















