DigiLocker सरकारी दस्तावेजों को सुरक्षित रखने का भरोसेमंद डिजिटल प्लेटफॉर्म है, लेकिन प्ले स्टोर पर इसके नाम से बने नकली ऐप्स यूजर्स के आधार, पैन और बैंक डिटेल्स चुरा रहे हैं। साइबर ठग असली जैसा दिखावा करके लाखों लोगों को फंसा रहे हैं। सावधानी से असली ऐप पहचानें ताकि निजी जानकारी सुरक्षित रहे।

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नकली ऐप्स कैसे कर रहे धोखा?
ये ऐप्स यूजर्स को लुभाने के लिए आकर्षक नाम और लोगो इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अंदर से वे संवेदनशील डेटा हड़प लेते हैं। इंस्टॉल होते ही वे पासवर्ड, ओटीपी और दस्तावेज कैप्चर कर लेते हैं, जिससे पहचान चोरी या पैसे की हेराफेरी हो जाती है। गलती से डाउनलोड करने पर तुरंत अनइंस्टॉल करें और सभी लिंक्ड अकाउंट्स के पासवर्ड बदल दें।
असली DigiLocker की खास निशानियां
- डेवलपर का नाम साफ-साफ “नेशनल ई-गॉवर्नेंस डिवीजन” या गवर्नमेंट ऑफ इंडिया लिखा होता है, कोई अनजान नाम न दिखे।
- डाउनलोड नंबर्स करोड़ों में होते हैं, कम काउंट वाले ऐप से दूर रहें।
- ऐप का लोगो, स्पेलिंग और डिजाइन बिल्कुल परफेक्ट होता है, छोटी सी गलती भी संकेत है।
- हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से लिंक लेकर डाउनलोड करें।
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सुरक्षित तरीके से ऐप इंस्टॉल करें
आधिकारिक साइट पर जाकर नीचे दिए प्ले स्टोर लिंक का इस्तेमाल करें, ताकि कोई मिडिलमैन न आए। रिव्यूज ध्यान से पढ़ें और हाई रेटिंग वाले चुनें। फोन में मौजूद ऐप हो तो सेटिंग्स से डेवलपर वेरिफाई कर लें। अपडेट्स खुद-ब-खुद चेक होते रहें।
शक हो तो तुरंत एक्शन लें
संदिग्ध ऐप मिले तो हटा दें, पासवर्ड रीसेट करें और साइबर क्राइम वेबसाइट पर शिकायत करें। दोस्तों-रिश्तेदारों को अलर्ट शेयर करें। DigiLocker से करोड़ों दस्तावेज सुरक्षित हैं, इसे फर्जी ऐप्स से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

















