
दिल्ली सरकार ने राजधानी में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी (EV Policy) पर काम तेज कर दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार जनवरी के पहले सप्ताह तक नई EV पॉलिसी को आधिकारिक रूप से लागू कर सकती है। यह पॉलिसी खासतौर पर मिडिल क्लास, छोटे वाहन चालकों और कमर्शियल ड्राइवर्स को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
दिल्ली पहले से ही देश के उन राज्यों में शामिल है जहां इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है। नई EV पॉलिसी को राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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Electric Two-Wheeler पर 35 से 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नई EV पॉलिसी का सबसे बड़ा फोकस दोपहिया वाहनों (Electric Scooter और Electric Bike) पर होगा। अगर कोई व्यक्ति अपने पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहन को Electric Vehicle (EV) में बदलता है या नया इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदता है, तो उसे 35,000 से 40,000 रुपये तक की सीधी सब्सिडी (Subsidy) मिल सकती है।
इस प्रस्ताव का मकसद यह है कि आम लोग, खासतौर पर ऑफिस जाने वाले, स्टूडेंट्स और डिलीवरी सेक्टर से जुड़े युवा, आसानी से इलेक्ट्रिक व्हीकल को अपना सकें। बढ़ती पेट्रोल कीमतों के बीच यह सब्सिडी इलेक्ट्रिक वाहनों को आर्थिक रूप से ज्यादा आकर्षक बनाएगी।
Commercial Vehicles को भी मिलेगा फायदा
नई EV पॉलिसी सिर्फ प्राइवेट वाहन मालिकों तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार की योजना कमर्शियल थ्री व्हीलर चालकों को भी बड़ी राहत देने की है। ऑटो, ई-रिक्शा और अन्य Commercial Three-Wheeler को पेट्रोल या CNG से Electric में कन्वर्ट करने पर भी भारी सब्सिडी देने का प्रस्ताव ड्राफ्ट में शामिल है।
इस कदम से न सिर्फ प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि ऑटो और ई-रिक्शा चालकों की रोजमर्रा की ईंधन लागत भी कम होगी, जिससे उनकी आमदनी में इजाफा होने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि कमर्शियल सेक्टर में EV Adoption तेजी से होने पर राजधानी की हवा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखा जा सकता है।
20 लाख रुपये तक के वाहनों को EV में बदलने की योजना
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी का दायरा सिर्फ छोटे वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले 20 लाख रुपये तक की कीमत वाले वाहनों को भी Electric Vehicle में शिफ्ट करने के लिए सब्सिडी देने का प्रस्ताव शामिल किया गया है।
इसका सीधा फायदा उन परिवारों और व्यवसायों को मिलेगा, जो मिड-रेंज कारों का इस्तेमाल करते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग Fossil Fuel आधारित वाहनों से हटकर Electric Mobility की ओर कदम बढ़ाएं।
सर्टिफिकेट को लेकर सरकार सख्त
EV पॉलिसी के साथ-साथ दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रण को लेकर भी सख्त रुख अपनाने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में साफ किया है कि जिन वाहनों के पास PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट नहीं होगा, उन पर 10,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
फिलहाल स्थिति यह है कि PUC न होने पर लगाया गया जुर्माना लोग लोक अदालत के जरिए मात्र 100 रुपये देकर माफ करवा लेते हैं। सरकार अब इस व्यवस्था को खत्म कर ज्यादा सख्ती लाने की तैयारी में है, ताकि लोग समय पर PUC सर्टिफिकेट बनवाएं और प्रदूषण नियंत्रण में सहयोग करें।
Ola-Uber के साथ Private Bus सेवा पर चर्चा
इसी कड़ी में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने Ola और Uber जैसी राइड-हेलिंग कंपनियों के साथ दिल्ली-NCR में प्राइवेट बसें चलाने की संभावना पर भी बातचीत की है। सरकार का उद्देश्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करना और लोगों को निजी वाहनों के बजाय साझा परिवहन (Shared Mobility) की ओर प्रोत्साहित करना है।
अगर यह योजना लागू होती है, तो इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में कमी आने की उम्मीद है।
EV Policy से क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि नई EV पॉलिसी लागू होने के बाद दिल्ली में Electric Vehicle की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है। भारी सब्सिडी, सख्त प्रदूषण नियम और बेहतर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मिलकर राजधानी को EV हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

















