
दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना हर सर्दियों में एक चुनौती बन चुका है। प्रदूषण का स्तर लगातार खतरनाक होता जा रहा है, और इस बार भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। राजधानी और आसपास के इलाकों में हवा इतनी खराब हो गई है कि सरकार को फिर से सख्त कदम उठाने पड़े हैं। यही वजह है कि फिलहाल पांचवीं तक के स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाने का निर्देश दिया गया है, यानी बच्चे चाहें तो ऑनलाइन क्लास से जुड़ सकते हैं या स्कूल जाकर भी पढ़ सकते हैं।
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ग्रैप-4 को लेकर फैली अफवाहों पर CAQM का स्पष्टीकरण
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें घूम रही थीं कि दिल्ली-एनसीआर में GRAP-4 (Graded Response Action Plan) लागू कर दिया गया है और जल्द ही स्कूल पूरी तरह बंद हो सकते हैं। लेकिन अब CAQM (Commission for Air Quality Management) ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और गलत करार दिया है। आयोग ने साफ कहा है कि फिलहाल पूरे एनसीआर में GRAP-3 लागू है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
सिर्फ आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करें
सीएक्यूएम ने बयान जारी कर जनता से अपील की कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन और प्रेस रिलीज़ पर ही भरोसा करें। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और टीवी चैनल्स ने यह दावा किया था कि GRAP-4 लागू हो चुका है, जबकि ऐसा नहीं है। आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, इस तरह की गलत जानकारी जनता में डर और भ्रम फैलाती है और प्रशासन की प्रदूषण-नियंत्रण तैयारियों में खलल डालती है।
दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल क्या चल रहा है?
वर्तमान में GRAP-3 (तीसरा चरण) लागू है। यह स्तर तब लागू किया जाता है जब हवा की गुणवत्ता “Severe” यानी AQI (Air Quality Index) 401 से 450 के दायरे में पहुंच जाती है। इस स्तर पर कई पाबंदियां अपने आप लागू हो जाती हैं, जैसे:
- निर्माण कार्यों (construction activities) पर रोक या सख्त निगरानी।
- डीज़ल-जनरेटर के उपयोग पर सीमाएं।
- खुले में कूड़ा या पत्ते जलाने पर जुर्माना।
- सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में work-from-home की सलाह।
- स्कूलों में छोटे बच्चों की क्लासेस को हाइब्रिड मोड में शिफ्ट करना।
दिल्ली सरकार ने फिलहाल पांचवीं तक के विद्यार्थियों को घर से पढ़ाई का विकल्प दिया है ताकि बच्चे प्रदूषित हवा से बच सकें।
कब लागू होता है GRAP-4?
कई लोग जानना चाहते हैं कि आखिर यह GRAP-4 क्या है और कब लागू होता है?
दरअसल, GRAP (Graded Response Action Plan) एक वैज्ञानिक सिस्टम है जिसे दिल्ली में 2017 में लागू किया गया था। इसके तहत प्रदूषण की गंभीरता के हिसाब से अलग-अलग स्टेज के नियम लागू किए जाते हैं —
| ग्रैप चरण | AQI रेंज | लागू स्थिति | मुख्य कदम |
|---|---|---|---|
| GRAP-1 | 201-300 | Moderate से Poor तक | सफाई बढ़ाना, एंटी-स्मॉग गन और वाटर स्प्रिंकलर का प्रयोग |
| GRAP-2 | 301-400 | Very Poor | निर्माण पर रोक, ट्रकों की एंट्री सीमित |
| GRAP-3 | 401-450 | Severe | स्कूलों में हाइब्रिड मोड, work from home सलाह, डीज़ल जेनरेटर पर बैन |
| GRAP-4 | 450+ | Severe Plus | स्कूल-कॉलेज बंद, सार्वजनिक परिवहन की संख्या बढ़ाना, सभी निर्माण कार्य रोकना |
अभी दिल्ली-एनसीआर का AQI करीब 420 के आसपास है, इसलिए फिलहाल GRAP-3 ही लागू है। GRAP-4 तभी लागू किया जाएगा जब यह स्तर 450 के पार चला जाएगा और हवा “Severe Plus” कैटेगरी में आ जाएगी।
आयोग की चेतावनी और अपील
सीएक्यूएम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि GRAP के अगले चरण या किसी भी बदलाव की घोषणा केवल आयोग की ओर से की जाएगी। जनता से अपील की गई है कि वे बिना सत्यापित खबरों पर ध्यान न दें और अफवाहें फैलाने से बचें।
आयोग का कहना है कि प्रदूषण से निपटना सिर्फ सरकारी एजेंसियों की नहीं बल्कि नागरिकों की भी जिम्मेदारी है। सभी से अनुरोध है कि कारपूलिंग अपनाएं, बेवजह गाड़ियां न चलाएं, और खुले में कूड़ा या पत्ते न जलाएं।
दिल्ली में प्रदूषण का असली हाल
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पराली जलाने, वाहनों के उत्सर्जन और ठंडी हवाओं के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता तेजी से गिरती है। इस समय हवा स्थिर हो जाने के कारण प्रदूषक तत्व ऊपर नहीं उठ पाते और प्रदूषण का स्तर बढ़ता चला जाता है। यही वजह है कि स्कूलों को हाइब्रिड मोड में चलाना बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक आवश्यक कदम है।

















