
महान कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र में खुशहाल जीवन के कई गुप्त सूत्र बताए हैं, चाणक्य के अनुसार, मनुष्य की कुछ गलतियां एक हँसते-खेलते परिवार को बर्बादी की कगार पर खड़ा कर देती हैं, यदि समय रहते इन आदतों को न बदला जाए, तो सुखी घर भी नर्क के समान बन जाता है और जीवन भर क्लेश पीछा नहीं छोड़ता।
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मूर्खों को तवज्जो और विद्वानों का अपमान
चाणक्य नीति के अनुसार, जिस स्थान या परिवार में मूर्ख व्यक्तियों का सम्मान होता है और बुद्धिमानों की सलाह को दरकिनार किया जाता है, वहां विनाश तय है। यदि घर के महत्वपूर्ण निर्णय अज्ञानी लोगों के हाथों में हों, तो वह परिवार कभी तरक्की नहीं कर सकता। ऐसे घरों में अक्सर गलत फैसले लिए जाते हैं, जो अंततः अशांति और आर्थिक तबाही का कारण बनते हैं।
निरंतर गृह-क्लेश और एकता की कमी
‘एकता में बल है’—यह कहावत चाणक्य नीति पर सटीक बैठती है, आचार्य कहते हैं कि जिस घर के सदस्य आपस में ही एक-दूसरे के प्रति द्वेष रखते हैं और छोटी-छोटी बातों पर लड़ते हैं, वहां दरिद्रता का वास होने लगता है, ऐसे घर में बाहरी लोग फूट डालकर अपना स्वार्थ सिद्ध करते हैं, शांति के अभाव में मानसिक तनाव बढ़ता है और परिवार बिखर जाता है।
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अन्न और संसाधनों का अनादर
चाणक्य के अनुसार, अन्न को देवता माना गया है, जिस घर में अन्न की बर्बादी होती है या संसाधनों का सही ढंग से प्रबंधन नहीं किया जाता, वहां देवी लक्ष्मी कभी नहीं ठहरतीं, फिजूलखर्ची और संचय की कमी सुखी घर को दरिद्रता के दलदल में धकेल देती है, अनुशासनहीन जीवनशैली और अन्न का अपमान हंसते-खेलते घर को नर्क बना देता है।
आचार्य चाणक्य का मानना है कि यदि कोई परिवार इन तीन दोषों से मुक्त रहता है. अर्थात जहाँ विद्वानों का सम्मान हो, आपसी प्रेम हो और संसाधनों का सही उपयोग हो वह घर पृथ्वी पर स्वर्ग के समान है।

















