
भारतीय रेलवे ने बिहार में रेल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने और बिजली संकट से निपटने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है, पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के दानापुर मंडल ने ट्रेनों को ‘सौर ऊर्जा’ (Solar Energy) से लैस करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है, अब ट्रेनों की छतों पर लगे सोलर पैनल न केवल बिजली बनाएंगे, बल्कि भीषण गर्मी में भी बोगियों के AC और पंखों को निर्बाध रूप से चालू रखेंगे।
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बिजली संकट के बीच रेलवे का ‘सोलर कवच’
अक्सर देखा जाता है कि बिजली की तकनीकी खराबी या लोड बढ़ने के कारण ट्रेनों का एयर कंडीशनिंग (AC) सिस्टम फेल हो जाता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी होती है, रेलवे की इस नई तकनीक के तहत बोगियों की छतों पर सोलर प्लेट्स लगाई जा रही हैं, ये प्लेट्स सूरज की रोशनी को बिजली में बदलकर बैटरी बैंक को चार्ज करेंगी, जिससे बिजली कटने की स्थिति में भी लाइट, पंखे और AC चलते रहेंगे।
पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा
रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से प्रति कोच सालाना लगभग 1.5 लाख रुपये की बचत होगी, इसके अलावा, सौर ऊर्जा के उपयोग से ट्रेनों में लगने वाले भारी और शोर करने वाले जनरेटर (Power Cars) पर निर्भरता कम होगी। इससे न केवल डीजल बचेगा, बल्कि ध्वनि और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी।
ट्रायल के बाद मेमू और इंटरसिटी में होगा विस्तार
वर्तमान में दानापुर मंडल के कुछ विशेष ‘कैंपेन कोच’ पर इसका सफल परीक्षण किया जा रहा है, रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती सफलता के बाद इस तकनीक को बिहार से चलने वाली मेमू (MEMU) और इंटरसिटी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में भी लागू किया जाएगा।
2030 तक ‘नेट जीरो’ का लक्ष्य
यह कदम भारतीय रेलवे के उस बड़े संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत साल 2030 तक रेलवे को ‘नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है, बिहार में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत से रेल नेटवर्क को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक नई गति मिली है।
अब बिहार के यात्रियों को सफर के दौरान बिजली गुल होने या गर्मी से परेशान होने की चिंता नहीं करनी होगी, क्योंकि आपकी ट्रेन अब ‘सूर्य देव’ की शक्ति से दौड़ेगी।

















