
भारत जैसे विशाल देश में गरीबी और भूख एक बड़ी सामाजिक चुनौती रही है। खासकर दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों, बेघर लोगों और कम आय वर्ग के लिए रोज़ का भोजन जुटाना आसान नहीं होता। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर ऐसी योजनाएं शुरू करती रही हैं, जिनका मकसद बेहद कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
देश के कई राज्यों में आज ऐसी Food Security Schemes चलाई जा रही हैं, जिनके जरिए रोजाना लाखों लोगों को सस्ती थाली मिल रही है। ये योजनाएं न सिर्फ भूख मिटा रही हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की दिशा में भी एक मजबूत कदम हैं।
Table of Contents
सरकारी फूड स्कीम्स: गरीबों के लिए वरदान
सरकार की ये योजनाएं खास तौर पर शहरी गरीब, दिहाड़ी मजदूर, निर्माण श्रमिक, रिक्शा चालक और अस्पतालों के आसपास रहने वाले जरूरतमंद लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं। कम कीमत में पौष्टिक खाना देकर सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए।
नीचे जानते हैं देश की कुछ प्रमुख और सफल Low-Cost Food Schemes के बारे में—
1. अम्मा कैंटीन, तमिलनाडु: एक रुपये में इडली, पांच रुपये में भरपेट भोजन
तमिलनाडु की अम्मा कैंटीन देश की सबसे चर्चित और सफल सरकारी फूड योजनाओं में से एक है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को बेहद कम दामों में पौष्टिक और स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है।
राज्यभर में लगभग 400 अम्मा कैंटीन संचालित की जा रही हैं, जहां हर दिन हजारों लोगों को खाना मिलता है। यहां मिलने वाले भोजन की कीमतें आम आदमी की पहुंच में हैं—
- 1 रुपये में इडली
- 5 रुपये में सांभर चावल और करी पत्ते चावल
- 3 रुपये में दही चावल
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम कीमत के बावजूद खाने की गुणवत्ता और पोषण पर कोई समझौता नहीं किया जाता। अम्मा कैंटीन आज तमिलनाडु में गरीबों के लिए भोजन का भरोसेमंद सहारा बन चुकी है।
2. अटल कैंटीन, दिल्ली: सिर्फ 5 रुपये में दो वक्त का खाना
दिल्ली में शुरू की गई अटल कैंटीन योजना का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में रखा गया है। उनकी जयंती के अवसर पर राजधानी में 100 अटल कैंटीन शुरू की गई थीं।
इन कैंटीनों का मुख्य उद्देश्य दिहाड़ी मजदूरों, श्रमिकों और कम आय वाले परिवारों को राहत देना है। यहां सिर्फ 5 रुपये में भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
अटल कैंटीन की प्रमुख विशेषताएं:
- हर कैंटीन में दिन में दो बार भोजन
- भोजन में शामिल:
- दाल और चावल
- रोटी और सब्जियां
- शुद्ध और पौष्टिक खाना
- श्रमिक इलाकों और जरूरतमंद क्षेत्रों में संचालन
कम कीमत और नियमित भोजन की सुविधा के कारण अटल कैंटीन दिल्ली के गरीब वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
3. आहार केंद्र, ओडिशा: अस्पतालों के पास गरीबों का सहारा
ओडिशा सरकार द्वारा चलाई जा रही आहार केंद्र योजना भी एक प्रभावी फूड सिक्योरिटी पहल है। इस योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद लोगों को लंच और डिनर कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है।
राज्य में कुल 167 आहार आउटलेट संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें से अधिकतर को रणनीतिक रूप से अस्पतालों के पास स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य मरीजों के परिजनों और आसपास रहने वाले गरीब लोगों को सस्ता भोजन उपलब्ध कराना है।
यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो इलाज के दौरान लंबे समय तक अस्पतालों के आसपास रहते हैं और महंगे खाने का खर्च नहीं उठा सकते।
राजस्थान की अन्नपूर्णा रसोई योजना भी बनी मिसाल
इन योजनाओं के अलावा राजस्थान में भी अन्नपूर्णा रसोई योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत जरूरतमंद लोगों को सस्ते दामों पर भोजन उपलब्ध कराया जाता है। यह योजना भी राज्य में गरीबों के लिए भोजन की गारंटी बनकर उभरी है।

















