
मध्य-पूर्व में हाल ही में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समर्थित सैनिक बलों ने दक्षिण यमन के सभी आठ गवर्नरेट्स (प्रशासनिक क्षेत्रों) पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। इससे अब यह संभावना बहुत बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में दक्षिण यमन खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर सकता है।
दरअसल, दक्षिण यमन में सक्रिय संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) पिछले कई वर्षों से अलग राज्य बनने की मांग कर रहा था। पिछले सप्ताह इसके करीब 10,000 सैनिकों ने तेल संपन्न हद्रामौत गवर्नरेट और ओमान सीमा से लगे माराह गवर्नरेट तक बढ़त बना ली। यह पहली बार हुआ है जब STC ने 1960 के दशक के पुराने दक्षिण यमन के पूरे हिस्से पर अपना अधिकार स्थापित किया।
Table of Contents
1960 के दशक का इतिहास फिर से दोहराने की आहट
दक्षिण यमन 1967 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होकर “पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ यमन” बना था, जबकि उत्तर का हिस्सा “अरेब रिपब्लिक ऑफ यमन” कहलाता था। 1990 में दोनों का विलय होकर एकीकृत यमन बना। लेकिन पिछले एक दशक से देश गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। अब इतिहास खुद को दोहराने की राह पर दिख रहा है और यमन फिर से दो हिस्सों में बंटने की ओर बढ़ रहा है।
सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका
सऊदी अरब, जो लंबे समय से यमन में प्रमुख विदेशी हस्तक्षेपकर्ता रहा है, इस घटनाक्रम से स्पष्ट रूप से हाशिए पर चला गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी की सेना ने अदन के प्रेसिडेंशियल पैलेस और एयरपोर्ट से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है।
यह यूएई की साफ़-सुथरी रणनीतिक जीत मानी जा रही है। जबकि सऊदी अरब द्वारा समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार अब केवल उत्तरी हिस्से तक सीमित हो गई है। यह स्थिति सऊदी राजनीति और उसकी क्षेत्रीय प्रभाव क्षमता, दोनों को कमजोर कर सकती है।
संयुक्त अरब अमीरात की कूटनीतिक जीत
UAE लंबे समय से दक्षिण यमन में STC को समर्थन दे रहा है। यूएई के लिए यह जीत केवल सैन्य नहीं, बल्कि एक डिप्लोमैटिक मास्टरस्ट्रोक साबित हुई है। दक्षिण यमन पर नियंत्रण के साथ अब UAE को लाल सागर, अदन की खाड़ी और हद्रामौत के तेल संसाधनों तक सीधी पहुंच मिल जाएगी।
यह नियंत्रण भविष्य में कच्चे तेल और समुद्री व्यापार को लेकर उसकी राजनीतिक स्थिति को और भी मजबूत बनाएगा। कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि यह कदम UAE की “शक्ति विस्तार नीति (Regional Power Expansion)” का हिस्सा है, जिसके जरिए वह खाड़ी देशों में अपना प्रभुत्व बढ़ाना चाहता है।
ओमान सीमा पर तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
UAE समर्थित कार्रवाई से पड़ोसी ओमान भी असहज हो गया है। हालात बिगड़ते देख ओमान ने अस्थायी रूप से अपनी सीमा बंद कर दी थी। हालांकि बाद में दबाव में आकर उसे खुलना पड़ा। ओमान शांति और तटस्थता की नीति का पक्षधर है, इसलिए उसे इस क्षेत्र में बाहरी सैन्य गतिविधियों से असंतोष है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र (UN) और पश्चिमी देशों ने यमन के विभाजन का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस कदम से शांति वार्ता और संघीय सरकार के गठन का रास्ता और कठिन हो जाएगा।
क्या दक्षिण यमन आजादी का ऐलान करेगा?
ऐसा माना जा रहा है कि STC फिलहाल सीधे आजादी का ऐलान करने से बचेगा, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने का इंतजार कर सकता है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि संगठन जनमत संग्रह (Referendum) कराकर दक्षिण यमन की स्वतंत्रता को वैधता देने की कोशिश करेगा। हालांकि STC का भविष्य अब बड़ी हद तक UAE की रणनीति पर निर्भर करेगा क्या वह इसे एक वास्तविक स्वतंत्र देश बनाना चाहता है या केवल यमन में अपना प्रभाव क्षेत्र मजबूत करना चाहता है।

















