
आजकल हर मां-बाप की यही चिंता रहती है कि बच्चा पढ़ाई से जी जान लगाकर क्यों नहीं लगाता। किताब खोलते ही बहाने बनाता है, मोबाइल या टीवी में घंटों बिताता है, और होमवर्क के नाम पर झगड़ा हो जाता है। लेकिन दोस्तों, डांट-फटकार से कुछ नहीं होगा। बच्चे को पढ़ाई का दोस्त बनाना है, दुश्मन नहीं। मैं खुद दो बच्चों का पिता हूं, इसलिए जानता हूं ये कितना मुश्किल लगता है। चलिए, कुछ आसान और मजेदार टिप्स शेयर करता हूं, जो अपनाकर आप बच्चे को खुद पढ़ाई की ओर खींच सकते हैं। बस थोड़ा धैर्य रखें!
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बच्चे की मनोदशा पहले समझें
हर बच्चा अलग होता है यार। एक को मैथ्स से डर लगता है, दूसरे को साइंस बोरिंग लगती है। पहले ये पता लगाएं कि बच्चा पढ़ाई से क्यों कतराता है – क्या टीचर की वजह से, दोस्तों के आगे कमजोर महसूस करता है, या घर का दबाव ज्यादा है? उसके साथ बैठें, चाय पीते हुए बात करें। जब बच्चा ये महसूस करेगा कि आप उसकी सुन रहे हैं, तो वो खुलकर बोलेगा। ये पहला कदम है, जो जादू कर देगा।
डांटने की बजाय दोस्त बनें
डांटोगे तो बच्चा और दूर भागेगा। पढ़ाई को सजा मत बनाओ। इसके बजाय उसके साथी बन जाओ। अगर होमवर्क में मदद चाहिए, तो मिलकर करो। कहो, ‘चल बेटा, आज 30 मिनट साथ पढ़ते हैं, फिर आइसक्रीम खाएंगे।’ ऐसी छोटी खुशियां बच्चे को पढ़ाई से जोड़ देंगी। याद रखो, जबरदस्ती से कभी कोई सीखता नहीं।
पढ़ाई का बेस्ट टाइम ढूंढें
सबके दिमाग का अलग रिदम होता है। कोई सुबह 6 बजे फ्रेश होता है, तो कोई शाम 5 बजे। बच्चे को ऑब्जर्व करो – कब वो सबसे ज्यादा फोकस करता है। उसी टाइम 45-60 मिनट की पढ़ाई शेड्यूल करो। बीच में 10 मिनट ब्रेक दो, ताकि बोर न हो। ऐप्स जैसे Pomodoro यूज करो, जो टाइमर सेट करके गेम की तरह बनाता है।
खेल-खेल में सीखें सबक
बच्चे तो खेलना पसंद करते हैं न! पढ़ाई को बोझ मत बनाओ, गेम बना दो। चार्ट्स बनवाओ, फ्लैशकार्ड्स से क्विज खेलो, या स्टोरी बनाकर हिस्ट्री पढ़ाओ। उदाहरण के लिए, साइंस के कॉन्सेप्ट को कार्टून कैरेक्टर से समझाओ। ऐसी ट्रिक्स से बच्चा खुद हंसते-खेलते सीखेगा। यूट्यूब पर एजुकेशनल वीडियोज दिखाओ, लेकिन लिमिटेड टाइम।
स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करें
मोबाइल और टीवी आजकल पढ़ाई के सबसे बड़े दुश्मन हैं। बैन मत लगाओ, लिमिट सेट करो। कहो, ‘पढ़ाई के बाद 30 मिनट PUBG खेलना।’ पैरेंटल कंट्रोल ऐप्स इंस्टॉल करो। शाम को फैमिली टाइम रखो, जहां सब बिना गैजेट्स के बात करें। धीरे-धीरे बच्चा पढ़ाई को प्राथमिकता देगा।
मेहनत की तारीफ कभी न भूलें
टॉपर बनना जरूरी नहीं, मेहनत करना जरूरी है। बच्चा अगर एक चैप्टर भी पूरा करे, तो जोरदार ताली बजाओ। ‘वाह बेटा, कमाल कर दिया!’ कहो। छोटे-छोटे रिवॉर्ड दो – नया पेन, स्टिकर या फैमिली आउटिंग। ये मोटिवेशन बच्चे को आगे बढ़ाता रहेगा। नकारात्मक बातें कम करो, पॉजिटिव फीडबैक ज्यादा दो।
इन टिप्स को आजमाओ, एक हफ्ते में फर्क दिखेगा। बच्चा खुश रहेगा, आपकी चिंता कम होगी। पढ़ाई आदत बनेगी, तो भविष्य खुद संवर जाएगा। अगर आपके पास और आइडियाज हैं, तो शेयर जरूर करना!

















