Union Budget 2026: पेट्रोल और डीजल होंगे GST के तहत, कीमतों में गिरावट की संभावना

GST के तहत आने से फ्यूल की कीमतों में बड़ी गिरावट संभव। पूरे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक जैसी, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा भारी असर। जानिए कब और कैसे मिलेगा फायदा।

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Union Budget 2026: पेट्रोल और डीजल होंगे GST के तहत, कीमतों में गिरावट की संभावना
Union Budget 2026: पेट्रोल और डीजल होंगे GST के तहत, कीमतों में गिरावट की संभावना

यूनियन बजट 2026 से आम आदमी की जेब पर राहत पहुंच सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण-Nirmala Sitharaman 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी और इसमें पेट्रोल और डीजल को Goods and Services Tax-GST के तहत लाने की घोषणा हो सकती है। लंबे समय से पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग हो रही है। यदि यह कदम उठाया गया तो पूरे देश में इनकी कीमतें एक समान हो जाएंगी और रिटेल कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।

पेट्रोल और डीजल पर वर्तमान टैक्स सिस्टम

वर्तमान में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर कई तरह के टैक्स लगाए जाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  1. एक्साइज ड्यूटी-Excise Duty: केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता है।
  2. VAT-Value Added Tax: राज्य सरकारें फ्यूल पर अलग-अलग रेट्स के तहत VAT लगाती हैं।

देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर VAT की वजह से होता है। उदाहरण के लिए, अभी पेट्रोल की कीमतें लगभग 95 रुपये से 105 रुपये प्रति लीटर के बीच हैं, जबकि डीजल की कीमतें 88 रुपये से 96 रुपये प्रति लीटर के बीच हैं।

GST लागू होने पर VAT खत्म हो जाएगा, जिससे अलग-अलग शहरों में कीमतों का अंतर भी कम हो जाएगा।

GST में पेट्रोल और डीजल क्यों नहीं थे शामिल

GST का सिस्टम 1 जुलाई, 2017 को पूरे देश में लागू हुआ था। इसके तहत ज्यादातर प्रोडक्ट और सर्विसेज को लाया गया, लेकिन पेट्रोल और डीजल को इसके दायरे से बाहर रखा गया।

इसके पीछे मुख्य कारण यह था कि कुछ राज्य सरकारें इस फैसले से नाराज थीं। उनका मानना था कि अगर फ्यूल GST के तहत आ गया तो उनके रेवेन्यू-Revenue पर असर पड़ेगा।

लेकिन लंबे समय से विशेषज्ञ और आम जनता की मांग रही है कि पेट्रोल और डीजल को GST में लाया जाए। इससे न केवल कीमतों में स्थिरता आएगी, बल्कि देश में लॉजिस्टिक्स-Logistics और ट्रांसपोर्टेशन की लागत में भी कमी आएगी।

पेट्रोल और डीजल पर GST का प्रभाव

GST लागू होने के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मुख्य रूप से तीन बदलाव होंगे:

  1. VAT खत्म: राज्य सरकारों द्वारा लगाया गया VAT हट जाएगा।
  2. एक्साइज ड्यूटी की कमी: केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी में कटौती की संभावना।
  3. क्लीन GST स्लैब: GST के तहत तीन प्रमुख स्लैब हैं – 5%, 18%, और 40%। अभी तय नहीं हुआ कि पेट्रोल और डीजल पर कौन सा स्लैब लागू होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि GST लागू होने के बाद फ्यूल की रिटेल कीमतों में कमी आएगी। इसका लाभ सीधे आम आदमी को मिलेगा और रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों में भी असर दिखेगा।

पेट्रोल और डीजल की कीमतें कैसे बनती हैं

अभी पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें चार मुख्य कंपोनेंट से तय होती हैं:

  1. बेसिक कीमत-Basic Price: इसमें फ्यूल की उत्पादन लागत और ढुलाई-transportation खर्च शामिल है।
  2. डीलर का कमीशन-Dealer Commission: डीलर को मिलने वाला मुनाफा।
  3. एक्साइज ड्यूटी-Excise Duty: केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाता है।
  4. VAT-Value Added Tax: राज्य सरकारों द्वारा लगाया जाता है, अलग-अलग रेट्स पर।

GST लागू होने के बाद VAT और एक्साइज ड्यूटी का बड़ा हिस्सा हट जाएगा, जिससे फ्यूल की कीमतों में स्पष्ट कमी आएगी।

आम आदमी को मिलेगा लाभ

GST के तहत पेट्रोल और डीजल आने से आम आदमी को कई तरह की राहत मिलेगी:

  • फ्यूल की कीमतों में कमी और शहरों के बीच अंतर समाप्त।
  • लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन लागत में कटौती, जिससे दैनिक उपयोग की चीज़ों की कीमतों में भी गिरावट।
  • लंबी अवधि में आर्थिक स्थिरता और रेवेन्यू-Revenue का बेहतर प्रबंधन।

हालांकि, इसके लिए सभी राज्यों की सहमति जरूरी है। कुछ राज्यों को अपने रेवेन्यू-Revenue के नुकसान की चिंता हो सकती है, लेकिन केंद्र सरकार-Union Government ने इस कदम को लेकर काफी गंभीरता दिखाई है।

विशेषज्ञों की राय

एनालिस्ट और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर GST के तहत पेट्रोल और डीजल आते हैं, तो आम जनता को तुरंत ही कीमतों में राहत मिलेगी। साथ ही, Renewable Energy-रिन्यूएबल एनर्जी और अन्य ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश के लिए भी फंड उपलब्ध होने में मदद मिलेगी, क्योंकि फ्यूल पर टैक्स की बचत से संसाधन अन्य क्षेत्रों में खर्च किए जा सकते हैं।

Union Budget 2026
Author
Pinki

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