ISRO का PSLV-C62 मिशन फेल, भारत को लगा अरबों डॉलर का झटका! जानें अब कौन भरेगा इस नुकसान की भरपाई?

ISRO PSLV-C62 फेल: तीसरे चरण में गड़बड़ी, 16 सैटेलाइट्स ऑर्बिट फेल! श्रीहरिकोटा से EOS-N1 (DRDO) लॉन्च, DRDO+ग्लोबल पार्टनर्स (स्पेन-USA) शामिल। अरबों का नुकसान? बीमा से रिकवर! जांच जारी, ISRO का कमबैक हिस्ट्री। स्पेस बीमा क्लेम्स 2023 में $1B। नेक्स्ट मिशन स्ट्रॉन्ग!

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स्पेस की दुनिया में जीत के जश्न के साथ कभी-कभी ये गड़बड़ियां भी आ जाती हैं। ISRO का 2026 का पहला मिशन PSLV-C62 श्रीहरिकोटा से उड़ा, लेकिन तीसरे चरण में खराबी आ गई। 16 सैटेलाइट्स ऑर्बिट में नहीं पहुंच सके। पिछले साल PSLV-C61 के साथ भी वैसा ही हुआ था। ISRO चीफ ने कहा, जांच चल रही है। ये सुनकर दुख तो होता है, लेकिन ये एजेंसी को रोक नहीं पाती।

मिशन का मकसद

ये लॉन्च EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट के लिए था, जो DRDO का प्रोजेक्ट है। ये हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग और सर्विलांस के लिए डिजाइन किया गया। साथ में 14 और सैटेलाइट्स – कुल 16 पेलोड्स। ये सब बारीक डिटेल्स कैप्चर करने और नेशनल सिक्योरिटी मजबूत करने वाले थे। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ, लेकिन ऑर्बिट सेट करने में फेल। ऐसे मिशन पर करोड़ों खर्च होते हैं, सवाल वाजिब है – नुकसान कितना?

पार्टनर्स की लिस्ट

इस मिशन में सिर्फ ISRO अकेला नहीं था। इंडियन पार्टनर्स जैसे ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, स्पेस किड्ज इंडिया, सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी, असम डॉन बॉस्को यूनिवर्सिटी, दयानंद सागर यूनिवर्सिटी और लक्ष्मण ज्ञानपीठ शामिल थे। इंटरनेशनल लेवल पर स्पेन, ब्राजील, थाईलैंड, यूके, नेपाल, मॉरीशस, लक्जमबर्ग, यूएई, सिंगापुर, फ्रांस और अमेरिका के संस्थान भी कनेक्टेड। DRDO मुख्य कस्टमर था। ये कोलैबोरेशन दिखाता है कि ISRO ग्लोबल प्लेयर बन चुका है।

नुकसान का अंदाजा

एक PSLV लॉन्च पर 100-200 करोड़ रुपये तक खर्च हो जाता है, सैटेलाइट्स की वैल्यू मिलाकर अरबों में पहुंच जाता। फेलियर से रॉकेट, फ्यूल, ग्राउंड सपोर्ट सब वेस्ट। लेकिन अच्छी बात – ये झटका घातक नहीं। क्यों? क्योंकि बीमा कवर होता है। सैटेलाइट्स की हाई वैल्यू पर पहले ही पॉलिसी ले ली जाती। स्पेस इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम सेटल करती हैं, हालांकि पूरी रकम नहीं मिलती – नेगोशिएशन पर डिपेंड।

बीमा कैसे काम करता?

स्पेस बीमा आसान नहीं। फेलियर रेट हाई होने से सिर्फ कुछ बड़ी कंपनियां ही हैंडल करती हैं। बड़े सैटेलाइट्स (अरबों डॉलर वाले) का फुल कवर, छोटे वाले पर ऑपरेटर रिस्क लेते। 2023 में 1 बिलियन डॉलर के क्लेम्स हुए थे। ISRO जैसी एजेंसीज शर्तों के हिसाब से नेगो करतीं, और ज्यादातर रिकवर होता। बाकी? लर्निंग से नेक्स्ट मिशन स्ट्रॉन्ग बनाते।

आगे का रोडमैप

फेलियर से सबक लेकर ISRO हमेशा कमबैक करता। चंद्रयान, गगनयान जैसे सक्सेस इसके सबूत। PSLV-C62 की रिपोर्ट आने पर सुधार होंगे। गवर्नमेंट फंडिंग, प्राइवेट पार्टनरशिप से रिकवरी तेज। स्पेस सेक्टर में भारत का फ्यूचर ब्राइट – SSLV, GSLV नेक्स्ट। अगर आप स्पेस फैन हैं, तो वेट करें अगले लॉन्च के लिए!

Author
Pinki

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