सफर का रोमांच शुरू होते ही चक्कर, मतली या उल्टी ने मूड खराब कर दिया? ये मोशन सिकनेस है, जो करोड़ों यात्रियों को परेशान करती है। आखिर ऐसा क्यों होता है? दिमाग, आंखों और शरीर के संतुलन का क्या कनेक्शन? अच्छी खबर- इससे बचा जा सकता है! आइए, गहराई से समझें।

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मोशन सिकनेस की पहचान
कार, बस, ट्रेन, जहाज या हवाई जहाज में अचानक बेचैनी, सिर घूमना, पसीना आना, उल्टी की इच्छा- ये सब मोशन सिकनेस के संकेत हैं। खासकर पहाड़ी रास्तों या ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर ये तेज हो जाती है। हर तीन में से एक व्यक्ति इससे जूझता है, लेकिन किसी को तुरंत असर पड़ता है, तो किसी को लंबे सफर बाद।
दिमाग का कन्फ्यूजन
सफर के दौरान आपकी आंखें स्थिरता दिखाती हैं, जैसे किताब पढ़ते या फोन स्क्रॉल करते हुए। लेकिन कान का अंदरूनी बैलेंस सिस्टम (वेस्टिबुलर सिस्टम) चीखता है- ‘हम हिल रहे हैं!’ दिमाग ये दो विरोधी संदेशों से घबरा जाता है। वो सोचता है, शायद जहर मिल गया, और बॉडी का रिएक्शन? उल्टी करके साफ करने की कोशिश!
कान के फ्लूइड में कंपन गर्दन से खोपड़ी तक जाती है, संतुलन बिगाड़ देती है। पेट की वेगस नर्व भी जॉइन हो जाती है- खाली पेट पर चक्कर, भरे पेट पर उल्टी। कभी ये गंभीर बीमारी का इशारा भी होता है, जैसे दिमाग की समस्या। बार-बार हो तो मेडिकल चेकअप जरूरी।
उल्टी रोकने के सुपर टिप्स
सबसे पहले, खाने पर ध्यान दें। सफर से ठीक पहले हल्का नाश्ता लें- फल, नट्स या ब्रेड। भारी तला-भुना अवॉइड करें, वरना पेट विद्रोह करेगा। खिड़की के पास बैठें और दूर की हरियाली या सड़क फोकस करें। इससे आंखें-कान एक ही बात कहेंगे, कन्फ्यूजन कम होगा।
मोबाइल, किताब या पढ़ाई बंद! चलते वाहन में ये मतली दोगुनी कर देती है। ड्राइवर सीट चुनें या सामने वाली जगह लें- सिर-कमर स्थिर रखें। हल्का संगीत सुनें, गहरी सांस लें। धूम्रपान या तेज गंध से दूर रहें। अगर बेचैनी हो, गाड़ी रोकें, ताजी हवा लें। डॉक्टर की सलाह से दवाएं जैसे एंटीहिस्टामाइन ट्राई करें।
महिलाओं पर ज्यादा असर
महिलाओं को ये दिक्कत पुरुषों से ज्यादा सताती है। लो ब्लड प्रेशर, खड़े रहने से BP गिरना (पोश्चरल हाइपोटेंशन), पीरियड्स के हार्मोनल उतार-चढ़ाव और बॉडी स्ट्रक्चर के फर्क से खतरा बढ़ता है। रसोई या घर के कामों से थकान जोड़ लें, तो सफर में चक्कर पक्का। समाधान? हाइड्रेटेड रहें, नमक-पानी बैलेंस रखें, और टिप्स फॉलो करें।
मोशन सिकनेस जेनेटिक भी हो सकती है, लेकिन जागरूकता से कंट्रोल में आ जाती है। अगली ट्रिप पर इन राज़ों को अपनाएं- सफर बनेगा यादगार, न कि सिरदर्द!

















