
साल 2026 की शुरुआत के साथ ही दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों की नई रैंकिंग जारी कर दी गई है, वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू (WPR) द्वारा संकलित इस सूची ने वैश्विक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, चौंकाने वाली बात यह है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति होने के बावजूद, भारत इस बार ‘टॉप-10’ की फेहरिस्त में जगह बनाने में नाकाम रहा है।
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कौन हैं दुनिया के ‘टॉप 10’ सूरमा?
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अपना पहला स्थान बरकरार रखा है, जबकि चीन और रूस क्रमशः दूसरे और तीसरे पायदान पर मजबूती से टिके हुए हैं। 2026 की टॉप 10 सूची इस प्रकार है:
- अमेरिका
- चीन
- रूस
- यूनाइटेड किंगडम (UK)
- जर्मनी
- दक्षिण कोरिया
- फ्रांस
- जापान
- सऊदी अरब
- इजराइल
चौथी बड़ी सेना, फिर भी भारत पीछे क्यों?
भारत की सैन्य ताकत (Global Firepower) और जीडीपी के आंकड़ों को देखते हुए यह सवाल उठना लाजिमी है कि भारत 12वें नंबर पर क्यों है? जानकारों के मुताबिक, यह रैंकिंग केवल तोप-बंदूक या जीडीपी के आधार पर नहीं, बल्कि ‘U.S. News & World Report’ के मॉडल पर आधारित है, जो पांच मुख्य कारकों को तौलता है।
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प्रति व्यक्ति आय और आर्थिक विषमता
भारत दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था तो बन गया है, लेकिन विशाल आबादी के कारण ‘प्रति व्यक्ति आय’ (Per Capita Income) के मामले में देश अभी भी विकसित देशों से बहुत पीछे है, रैंकिंग में इसे एक बड़ी कमजोरी माना गया है।
अंतरराष्ट्रीय गठबंधन (Alliances)
रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के अमेरिका के साथ जितने मजबूत सामरिक और सुरक्षा गठबंधन हैं, भारत की ‘गुटनिरपेक्ष’ और ‘स्वतंत्र’ नीति के कारण उसके पास वैसे औपचारिक गठबंधन नहीं हैं, क्षेत्रीय व्यापार समझौतों (जैसे RCEP) से बाहर रहने को भी आर्थिक प्रभाव की कमी के रुप में देखा गया।
राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां
- अध्ययन में भ्रष्टाचार, आंतरिक राजनीतिक चुनौतियां और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मानकों पर भारत का स्कोर अन्य शीर्ष देशों की तुलना में कम रहा है।
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तकनीकी बुनियादी ढांचा
सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में नाम होने के बावजूद, हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग और अत्याधुनिक तकनीकी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में भारत अभी भी चीन और जर्मनी जैसे देशों से मुकाबला करने की स्थिति में नहीं पहुंचा है।
हालांकि भारत इस सूची में 12वें स्थान पर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जिस गति से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का आधुनिकीकरण कर रहा है और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रुप में उभर रहा है, आने वाले वर्षों में रैंकिंग में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है, फिलहाल, प्रति व्यक्ति समृद्धि और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रभाव भारत के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं।

















