
निजी क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है, पिछले 11 वर्षों से टस से मस न होने वाली ईपीएफओ (EPFO) की सैलरी लिमिट अब बढ़ने के आखिरी पड़ाव पर है, श्रम मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद, वेतन सीमा को वर्तमान ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 या ₹30,000 किए जाने का प्रस्ताव मेज पर है।
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क्या है नया अपडेट?
सुप्रीम कोर्ट ने 7 जनवरी 2026 को केंद्र सरकार और EPFO को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इस पुरानी पड़ चुकी वेतन सीमा की समीक्षा करें और अगले चार महीनों के भीतर ठोस फैसला लें, कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और न्यूनतम वेतन में वृद्धि के कारण ₹15,000 की सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है।
किन कर्मचारियों को होगा सीधा फायदा?
- नए कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कवरेज: वर्तमान में, यदि किसी नए कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 से अधिक है, तो कंपनी के लिए उसका पीएफ काटना अनिवार्य नहीं है, सीमा बढ़कर ₹30,000 होने से लाखों नए कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ जाएंगे।
- पेंशन राशि में भारी उछाल: वर्तमान में पेंशन की गणना अधिकतम ₹15,000 पर ही होती है, सीमा बढ़ने से EPS (Employee Pension Scheme) के तहत मिलने वाली पेंशन की राशि दोगुनी तक हो सकती है।
- बड़ा रिटायरमेंट फंड: वेतन सीमा बढ़ने का मतलब है कि नियोक्ता (Employer) का योगदान भी बढ़ेगा, इससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली एकमुश्त राशि (Corpus) काफी बड़ी हो जाएगी।
इन-हैंड सैलरी पर क्या पड़ेगा असर?
यदि यह नियम लागू होता है, तो ₹15,000 से अधिक और ₹30,000 तक कमाने वाले कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि उनके वेतन से पीएफ की कटौती बढ़ जाएगी, हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कटौती भविष्य की सुरक्षा (पेंशन और इंश्योरेंस) के लिहाज से एक फायदे का सौदा है।
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कंपनियों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव का उद्योग जगत (कंपनियों) द्वारा विरोध किया जा रहा है, क्योंकि इससे कंपनियों का सामाजिक सुरक्षा पर खर्च (Compliance Cost) बढ़ जाएगा, सरकार वर्तमान में कंपनियों और कर्मचारी यूनियनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।
EPFO वेतन सीमा में आखिरी बार बदलाव सितंबर 2014 में किया गया था। अब 2026 में होने वाला यह संभावित बदलाव निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ‘रिटायरमेंट जैकपॉट’ साबित हो सकता है, सरकार के अंतिम फैसले के लिए अगले चार महीने बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

















