
प्रस्तावित बाईपास निर्माण को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच गतिरोध चरम पर पहुंच गया है, दो प्रमुख गांवों के किसानों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, संघर्ष तब भड़का जब यह जानकारी सामने आई कि परियोजना के लिए लगभग 70% जमीन का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है, जबकि किसान उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांगों पर अड़े हुए हैं।
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विवाद की मुख्य वजह
आंदोलनकारी किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने उनकी उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण ‘भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013’ के प्रावधानों को ताक पर रखकर किया है, किसानों का कहना है कि 70% जमीन अधिग्रहित होने के बाद अब उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है। विरोध प्रदर्शन के दौरान किसानों ने निर्माण कार्य रोक दिया और जिला मुख्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
किसानों की प्रमुख मांगें
- उचित मुआवजा: किसानों की मांग है कि उन्हें वर्तमान बाजार दर से चार गुना मुआवजा दिया जाए।
- पुनर्वास नीति: जिन परिवारों की शत-प्रतिशत भूमि अधिग्रहित हुई है, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी या वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
- सहमति का उल्लंघन: प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बिना पूर्ण सहमति के अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है, जो कानूनी रूप से गलत है।
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प्रशासनिक पक्ष
दूसरी ओर, जिला प्रशासन और एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों का तर्क है कि बाईपास निर्माण क्षेत्रीय विकास और यातायात के दबाव को कम करने के लिए अनिवार्य है, अधिकारियों के अनुसार, अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी है और अधिकांश किसानों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे विकास कार्यों में बाधा न डालें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें।
मौके पर तनाव बरकरार
फिलहाल, दोनों गांवों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे, किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो यह आंदोलन राज्य स्तर पर तेज किया जाएगा।

















