छोटे बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है या नहीं? Pediatrician ने बताया बच्चों पर पड़ने वाला असर

छोटे बच्चों की परवरिश को लेकर अक्सर माता-पिता के मन में कई सवाल होते हैं, इन्हीं में से एक संवेदनशील सवाल है— 'क्या बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है?' हाल ही में बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जो बच्चों के मानसिक विकास और उनकी सुरक्षा की समझ को सीधे तौर पर प्रभावित करती है

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छोटे बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है या नहीं? Pediatrician ने बताया बच्चों पर पड़ने वाला असर
छोटे बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है या नहीं? Pediatrician ने बताया बच्चों पर पड़ने वाला असर

छोटे बच्चों की परवरिश को लेकर अक्सर माता-पिता के मन में कई सवाल होते हैं, इन्हीं में से एक संवेदनशील सवाल है— ‘क्या बच्चों के सामने कपड़े बदलना या नहाना सही है?’ हाल ही में बाल रोग विशेषज्ञों (Pediatricians) ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जो बच्चों के मानसिक विकास और उनकी सुरक्षा की समझ को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।

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उम्र का सही संतुलन है जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में ‘उम्र’ सबसे बड़ा कारक है, 2 से 3 साल की उम्र तक बच्चों के लिए शरीर के अंगों को देखना जिज्ञासा का हिस्सा होता है। इस उम्र में वे अपने और दूसरों के शरीर के बीच के अंतर को समझना शुरू करते हैं, हालांकि, जैसे ही बच्चा 4 से 5 साल की उम्र (स्कूल जाने की उम्र) में प्रवेश करता है, माता-पिता को उनके सामने कपड़े बदलने में सावधानी बरतनी चाहिए।

प्राइवेसी और ‘बॉडी बाउंड्री’ की समझ

बाल रोग विशेषज्ञों का तर्क है कि बच्चों को कम उम्र से ही ‘प्राइवेसी’ (निजता) का महत्व समझाना अनिवार्य है, जब माता-पिता एक निश्चित उम्र के बाद बच्चों के सामने कपड़े बदलना बंद कर देते हैं, तो बच्चा अनजाने में ही ‘बॉडी बाउंड्री’ के बारे में सीखने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बच्चों को यह समझने में मदद करता है कि उनका शरीर निजी है और किसी को भी उनकी निजता का उल्लंघन करने का हक नहीं है।

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सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम

न्यूज रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की मानें तो घर में प्राइवेसी बनाए रखना ‘गुड टच और बैड टच’ की शिक्षा का पहला आधार है, यदि बच्चे बचपन से ही प्राइवेसी की अहमियत देखेंगे, तो वे बाहरी दुनिया में भी अपनी शारीरिक सीमाओं के प्रति सतर्क रहेंगे। यह उन्हें यौन शोषण जैसे गंभीर खतरों से बचाने में एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

प्रमुख पीडियाट्रिशियन के अनुसार, इस आदत के बच्चों पर दोतरफा असर हो सकते हैं:

  • सकारात्मक पहलू: बहुत छोटी उम्र में सहज रहने से बच्चों में अपने शरीर को लेकर शर्म खत्म होती है और वे शारीरिक अंगों के सही नाम और उनके कार्यों के बारे में वैज्ञानिक तरीके से सीख पाते हैं।
  • नकारात्मक पहलू: स्कूल जाने की उम्र के बाद भी प्राइवेसी न रखने से बच्चों में सामाजिक मर्यादाओं (Social Boundaries) को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।

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माता-पिता के लिए विशेषज्ञों की सलाह

  • शालीनता बरतें: जैसे ही बच्चा सवाल पूछने लगे या खुद असहज महसूस करे, समझ जाएं कि अब उनके सामने कपड़े बदलना बंद करने का समय आ गया है।
  • शिक्षित करें: बच्चों को बताएं कि नहाना और कपड़े बदलना एक व्यक्तिगत कार्य है और इसमें गोपनीयता जरूरी है।
  • उदाहरण पेश करें: दूसरों के कमरे में जाने से पहले दरवाजा खटखटाना जैसी आदतें डालकर आप उन्हें दूसरों की प्राइवेसी का सम्मान करना सिखा सकते हैं।

विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि बच्चों के सामने सहज रहना बुरा नहीं है, लेकिन 5 साल की उम्र के बाद मर्यादा और निजता के बीच एक रेखा खींचना बच्चे के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।

Pediatricians
Author
Pinki

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