
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य के बुनियादी ढांचे को न केवल आधुनिक बना रही है, बल्कि उन्हें पर्यावरण के अनुकूल (इको-फ्रेंडली) बनाने पर भी विशेष जोर दे रही है, इसी कड़ी में ‘ग्रीन रोड’ पहल के तहत बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे को एक भव्य ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में तब्दील किया जा रहा है इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद यात्रियों को एक्सप्रेसवे पर सफर करते समय किसी हिल स्टेशन जैसा सुखद अनुभव होगा।
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46,000 पौधों से सजेगा एक्सप्रेसवे का गलियारा
इस परियोजना के तहत एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर लगभग 46,000 पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है, इन पौधों के चयन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि वे न केवल छायादार हों, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यधिक लाभकारी हो, एक्सप्रेसवे के किनारे पीपल, नीम, और अर्जुन जैसे औषधीय और विशाल वृक्षों का रोपण किया जा रहा है, यह सघन वृक्षारोपण न केवल प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि भीषण गर्मी के दौरान स्थानीय तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद करेगा।
उत्तर प्रदेश का पहला सोलर एक्सप्रेसवे बनने की ओर कदम
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की खासियत सिर्फ इसकी हरियाली तक सीमित नहीं है, उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) इसे राज्य के पहले सौर ऊर्जा संचालित (Solar-powered) एक्सप्रेसवे के रूप में भी विकसित कर रहा है, एक्सप्रेसवे के किनारे सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिससे उत्पन्न बिजली का उपयोग सड़क की लाइटों और अन्य सुविधाओं के लिए किया जाएगा।
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पर्यटन और पर्यावरण को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रीन प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड जैसे सूखे और गर्म क्षेत्र की पारिस्थितिकी (Ecology) में बड़ा सुधार आएगा, हरा-भरा कॉरिडोर बनने से पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा, जिससे क्षेत्र में पर्यटन की नई संभावनाएं खुलेंगी।
मुख्य आकर्षण
- प्रदूषण मुक्त सफर: भारी वृक्षारोपण से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- हिल स्टेशन वाली फील: घने पेड़ों के बीच से गुजरती सड़क यात्रियों को ठंडक और सुकून प्रदान करेगी।
- औषधीय महत्व: नीम और अर्जुन जैसे पौधों से वातावरण शुद्ध रहेगा।
इस परियोजना की प्रगति और अन्य अपडेट्स के लिए आप UPEIDA की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं, सरकार का लक्ष्य इस साल के अंत तक वृक्षारोपण के बड़े हिस्से को पूरा कर एक्सप्रेसवे को नया स्वरूप देना है।

















